
रांची : टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम का जोश सातवें आसमान पर है. महिला हाकी टीम में शामिल सलीमा टेटे के सिमडेगा के गांव बड़कीछापर में टोक्यो से ज्यादा उत्साह है. रविवार को गांव में बिजली नहीं थी. गांव के लोगों को यह अंदेशा था कि सोमवार की सुबह क्वार्टर फाइनल मैच होगा, जिसमें भारत का मुकाबला आस्टेलिया से होना है और बिजली की वजह से मिस ना हो जाये, इसके लिये सलीमा के पिता सुलक्षण टेटे समेत ग्रामीण भी बेताब थे. धनरोपनी छोड़कर सभी ग्रामीण सलीमा के घर पर जुटे. इसके बाद दौड़ भाग शुरू हुई. अंततः भाड़े पर एक जेनरेटर की व्यवस्था की गयी, तब तक मैच 20 मिनट निकल चुका था. बावजूद इसके टीम इंडिया के मैच जीतने के बाद ही सबों ने जगह छोड़ी. इसके बाद ही घर औऱ खेत की कमान संभाली. टीम इंडिया ने भी ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनायी. सुलक्षण समेत ग्रामीणों ने भरोसा जताया कि अब टीम इंडिया टोक्यो ओलंपिक में शान से तिरंगा लहराकर ही लौटेगी. फिलहाल सुलक्षण अपनी पत्नी सुबानी टेटे और अपनी बेटियों के साथ गांव में ही रहते हैं. मिट्टी का एक कच्चा घर औऱ लाल राशन कार्ड उनके पास है. पांच बेटियां हैं जिनमें सलीमा चौथे नंबर पर हैं. खेल की अहमियत क्या होती है. ऐसे में कभी अपनी बेटियों को खेलने से रोका नहीं. अभी टोक्यो ओलंपिक में उनकी केवल एक बेटी नहीं खेल रही, पूरे देश की 11 बेटियां खेल रहीं. उन्हें और समूचे देश को ऐसी बेटियों पर नाज है. उन्हें भरोसा है कि सलीमा और टीम इंडिया जिस तरह से अभी खेल की रफ्तार बनाये हुए है, वे फाइनल में भी मनमाफिक रिजल्ट देंगी. देश की झोली में पदक डालेंगी.





