
चाकुलियाः जवाद तूफान का असर तो बहरागोड़ा में उतना नहीं हुआ जितना असर बारिश से फसल को हुई है. जवाद तूफान क्षेत्र के किसानों के लिए आफत साबित हुआ है. बहरागोड़ा धान की कटोरी के नाम से प्रसिद्ध है. क्षेत्र में किसान पूर्ण रूप से धान की खेती करते हैं. किसान अपनी धान की फसल को काट कर अपने खलिहान तक नही ले जा पाएं थे,कि बंगाल की खाड़ी से उठा जवाद तूफान ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है.(नीचे भी पढ़े)

किसान अपनी फसल को काट कर खेत में ही रखे थे तूफान के कारण विगत तीन दिनों तक हुई क्षेत्र में हल्की बारिश से सारा धान खेत में ही भींग जाने से खेत में पड़ी धान की बालियों से अब अंकूर निकलने लगा है. बड़ामारा गांव की महिला कृषक पुटी गोप ने अपनी दुखड़ा सुनाते हुए कहा कि वह दूसरे से तीन बीघा जमीन लेकर किसी तरह धान की खेती की थी ताकि सालों भर परिवार के लिए चावल की व्यवस्था हो सके. कहा कि फसल भी अच्छी हुई थी,वे अपनी धान की फसल को काटी तो तूफ़ान आ गया. (नीचे भी पढ़े)
वह फसल घर नही ले जा पाई थी सारा फसल खेत में ही पड़ा हुआ था. बारिश होने के कारण खेत में पड़ा धान पूरी तरह से भींग जाने के कारण अब धान की बालियों से अंकूर निकलने लगा है. कहा कि धान के भींगने से उन्हें काफी नुकसान हुआ है. यही हाल बहरागोड़ा विधान सभा क्षेत्र के लगभग हर किसानों की है. अभी भी अधिकांश किसानों की कटी हुई फसल खेतों में ही पड़ा हुआ है और धान के भींगने से किसान चिंतित और हताश है.



