
जमशेदपुरः 22 दिसंबर भारत और दुनिया के आदिवासियों के लिए एक स्वर्णिम ऐतिहासिक दिन है. इस दिन को ” हासा- भाषा जीतकर माहा ” अर्थात ” मातृभूमि- मातृभाषा विजय दिवस ” के रूप में मनाया जाता है. इस बार 22 दिसम्बर को झारखंड, बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम प्रदेशों के अलावे नेपाल, भूटान, बांग्लादेश में भी विजय दिवस मनाया जाएगा. 22 दिसंबर 1855 को अंग्रेजों ने संताल आदिवासियों को उनका देश- “संताल परगना ” और “संताल परगना टेनेंसी कानून” बनाकर आजादी प्रदान किया था. क्योंकि झारखंड के भोगनाडीह, वर्तमान साहेबगंज जिले में 30 जून 1855 को महान वीर शहीद सिदो मुर्मू के नेतृत्व में 10,000 संताल आदिवासी लड़ाकूओं ने अंग्रेजों के खिलाफ संताल हूल या संताल विद्रोह का बिगुल फूंका था. और अपनी जमीन, जीवन और आजादी के लिए खूनी क्रांति किया, बलिदान दिया था. (नीचे भी पढ़े)
तब मजबूर होकर अंग्रेजों ने संताल आदिवासियों को संताल परगना देकर एक प्रकार से आजाद कर दिया था. जबकि भारत देश को अंग्रेजों ने लगभग 100 साल बाद 1947 में आजाद किया. कार्ल मार्क्स ने संताल हूल को प्रथम जनक्रांति बताया था.22 दिसंबर 2003 को भारत और दुनिया की एकमात्र बड़ी आदिवासी भाषा – संताली भाषा को भारत के लोक सभा में राष्ट्रीय मान्यता मिली. आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया. यह भाषा सम्मान दुनिया भर के आदिवासियों के लिए एक महान भाषा सम्मान है. क्योंकि आज भारत और दुनिया की लगभग सभी आदिवासी भाषाएं विलुप्त होने के कगार पर खड़ी हैं. संताली भाषा मोर्चा के नेतृत्व में शामिल अनेक संगठनों और भाषा प्रेमियों के संघर्ष और सहयोग से यह संभव हुआ. (नीचे भी पढ़े)
अतएव सेंगेल भारत के मान्य राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मांग करती है कि 22 दिसंबर को राष्ट्रीय अवकाश और उत्सव दिवस के रुप में मनाया जाए. तथा भारतीय इतिहास में दर्ज 1857 के सिपाही विद्रोह की जगह 1855 के संताल हूल को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का दर्जा प्रदान किया जाए. चूंकि 1857 का सिपाही विद्रोह एक कारतूस या गोली में गाय या सूअर की चरबी के खिलाफ विरोध था.जबकि 1855 का संताल विद्रोह सीधे-सीधे अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ स्वतंत्रता का संग्राम था.हम संयुक्त राष्ट्र से भी मांग करते हैं कि जिस प्रकार पश्चिमी पाकिस्तान द्वारा पूर्वी पाकिस्तान ( अब बांग्लादेश) में उर्दू भाषा थोपने के खिलाफ बंगला भाषा के लिए 21 फरवरी 1952 को ढाका विश्वविद्यालय में छात्रों ने विद्रोह किया था. (नीचे भी पढ़े)
तब गोली चली, अनेक छात्र मारे गए और यूनेस्को ने उनकी याद में 21 फरवरी 1999 से 21 फरवरी को “अंतरराष्ट्रीय भाषा दिवस” के अनुपालन की घोषणा किया. उसी तर्ज पर यूएन से हमारी मांग है 22 दिसंबर को “हासा ( मातृभूमि ) – भाषा (मातृभाषा) विजय दिवस” अनुपालन की घोषणा करें. ताकि यह भारत ही नहीं विश्व के आदिवासियों के लाइफ लाइन अर्थात जल,जंगल, जमीन, जीवन और भाषा- संस्कृति की सुरक्षा और संवर्धन का संदेश दुनिया भर में प्रदान करेगा. 22 दिसम्बर को विजय दिवस के उपरांत सेंगेल 23 दिसम्बर से ” सरना धर्म कोड सह संताली राजभाषा सागाड़ या रथ ” साल के अंत तक 5 प्रदेशों में ज़िलावार चलाने का प्रयास करेगी. 30 दिसम्बर को सेंगेल के सहयोग से संचालित ” आल इंडिया संताली एडुकेशन कौंसिल का स्थापना दिवस भी मनाया जाएगा.






