
चाकुलिया : बहरागोड़ा के विधायक समीर महंती ने विधानसभा शीतकालीन सत्र में तारांकित प्रश्न काल में अपने विधानसभा क्षेत्र के सुदूर और पहाड़ी क्षेत्र में रह रहे आदिवासी और वनवासियों के बेरोजगारी और गरिबि का मामला उठाते हुए कहा कि सुदूर और पहाड़ पर जीवन बसर करने वाले ग्रामीण रोजगार के अभाव में दो जून की रोटी भी बड़े मुश्किल से जुगाड़ कर पाते हैं. अगर हम उन्हें काम नहीं दे सकते हैं तो कम से कम उन्हें रोजगार देने के लिए हमें वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में सोचना होगा. बहुत ऐसे लोग हैं जो जंगल से साल पत्ता तोड़कर हाथ से पत्तल और दोना निर्माण कर बेचकर किसी तरह जीवन यापन करते हैं. बहरागोड़ा विस क्षेत्र में अगर पत्तल और दोना बनाने वाले कुटीर उद्योग की स्थापना की जाए तो क्षेत्र में रोजगार का सृजन होगा और लोग लाभान्वित होंगे. वहीं शून्य काल में विधायक ने कहा कि कोराना काल में लॉकडाउन अवधि के उपरांत जब ट्रेनों का परिचालन शुरू किया गया आश्चर्यजनक रूप से हावड़ा-हटिया एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव चाकुलिया स्टेशन से रद्द कर दिया गया. इससे क्षेत्र के छात्र-छात्राओं के साथ ही ग्रामीण और व्यापारी वर्ग के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
श्री महंती ने कहा कि पूर्व में उक्त ट्रेन का ठहराव चाकुलिया स्टेशन पर था. यह एकमात्र ट्रेन है जो राजधानी से जोड़ती है. रोजाना ग्रामीण अपने कार्य के लिए राजधानी रांची आना जाना करते थे. उक्त ट्रेन का ठहराव रद्द होने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. विधायक समीर महंती ने उक्त ट्रेन के चाकुलिया स्टेशन पर ठहराव के लिए सरकार से त्वरित पहल करने की मांग की है. विधायक ने अल्पसूचित प्रश्न काल में वर्ष 2005-06 में नियुक्त शिक्षकों के पेंशन के मामले को भी उठाया है. विधायक ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति हेतु वर्ष 2003 में आयोजित परीक्षा में उतीर्ण पहले सूची के अभार्थियों को नियुक्ति दी गई, तदोपरांत कुछ अभ्यर्थियों के शैक्षणिक / प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्र गलत प्रमाणित होने पर उनके स्थान पर प्रतिक्षा सूची के अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई. परंतु बिडंबना का विषय यह है कि विज्ञापन वर्ष, परीक्षा वर्ष एक रूप होने के बावजूद वर्ष 2003 में नियुक्त शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना तथा 2005 में नियुक्त शिक्षकों को पेंशन योजना से अंतर्मुक्त किया गया है. विधायक ने इस विषय को स्पष्ट करते हुए कहा कि फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों को अगर नियुक्ति के पूर्व चिन्हित कर लिया जाता तो रिक्त स्थानों पर प्रतिक्षा सूची के अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलती तथा उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ प्राप्त होता. विभागीय गड़बड़ी के कारण इसका खामियाजा वर्ष 2005 में नियुक्त शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है. विधायक ने सरकार से मांग की है कि वर्ष 2005 में नियुक्त शिक्षकों को न्याय दिलाने की दिशा में सरकार की ओर से उचित पहल की जाए, ताकि शिक्षक वर्ग लाभान्वित हो सके.



