
जमशेदपुर, 22 : दिसंबर : भारत का इतिहास मुगलों ने लिखा है. इसमें सिखों के गुरुओं की त्याग, तपस्या और वीरता को छुपाया गया है. सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह ने औरंगजेब की 10 लाख की विशाल सेना का सामना अपने दो पुत्रों और 40 सिख सैनिकों से किया था. गुरु गोविंद सिंह के नेतृत्व में उन लोगों ने औरंगजेब की आधी सेना को नष्ट कर दिया था. चमकौर की गढ़ी के इस महायुद्ध में गुरु जी के दो पुत्र साहिबजादा अजीत सिंह और साहिबजादा जुझार सिंह शहीद हो गए थे. चमकौर के इस महायुद्ध को मुगल इतिहासकारों ने महत्वपूर्ण जगह नहीं दी क्योंकि इसमें सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह की वीरता, त्याग, बलिदान और धर्म के प्रति आस्था का बेमिसाल उदाहरण था. गुरु गोविंद सिंह देश और धर्म के लिए शहीद होने वाले पिता गुरु तेग बहादुर सिंह और 4 शहीद पुत्रों के पिता थे. ऐसा उदाहरण विश्व के इतिहास में कहीं नहीं मिलता है. गुरु गोविंद सिंह के सही इतिहास को सभी धर्म और समुदाय के बच्चों और युवाओं तक पहुंचाने का बीड़ा शार्दूल ऑटो वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड, मानगो के मालिक सरदार शार्दूल सिंह ने उठाया है. उन्होंने विख्यात कवि गंगा प्रसाद ‘कौशल’ द्वारा लिखित पुस्तक ‘चमकौर की गढ़ी’ का वितरण कराने का निर्णय लिया है. मालूम हो कविवर गंगाप्रसाद ‘कौशल’ वीर रस की कविता लिखने के लिए विख्यात हैं. उनकी पुस्तक ‘वीर बालक’ पर भारत सरकार उन्हें नगद राशि से पुरस्कृत कर चुकी है. कविवर ‘कौशल’ की प्रशंसा देश के विख्यात साहित्यकार महाकवि अयोध्या सिंह ‘हरिऔध’, आचार्य शिवपूजन सहाय, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’, श्री भगवती चरण वर्मा, महाकवि आचार्य जानकीवल्लभ ‘शास्त्री’, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, डॉक्टर रामकुमार वर्मा, डॉक्टर रामदयाल पांडेय वगैरह लिखित में कर चुके हैं. पुस्तक ‘चमकौर की गढ़ी’ के प्रकाशक ने अपील की है कि सिखों के सच्चे इतिहास को दर्शाने वाली ‘चमकौर की गढ़ी’ पुस्तक का प्रचार प्रसार सिख सहित हर धर्म और समुदाय के लोग करें, जिससे गुरु गोविंद सिंह जी का त्याग, बलिदान और सिख धर्म के प्रति उनकी आस्था का सच्चा प्रचार हो सके. इस पुस्तक में मानगो सहित जमशेदपुर के कई गुरुद्वारों ने भी अपनी रुचि दिखाई है.




