
जमशेदपुर : श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह जी के आदेश के अनुसार मूल मंत्र जाप के साथ साकची गुरुद्वारा में पिछले आठ दिनों से चल रहा जपुजी साहब की लड़ीवार पाठ का समापन हो गया. इस मौके पर शहीदों को सिख पंथ की पहचान एवं उसकी नींव बताते हुए प्रधान हरविंदर सिंह मंटू ने कहा कि कोई भी धर्म, विरासत, संस्कृति यदि आज अस्तित्व में है इसकी सारी दें महान मातृशक्ति को है. सिख पंथ में गुरु नानक देव जी ने बराबरी नहीं बल्कि पुरुष से ऊपर दर्जा हमारी नारी जाति को दिया है. यह दिसंबर का महीना शहादत का महीना है वही सिख धर्म की बुनियाद भी है. गुरु तेग बहादुर जी, सती दास, मती दास, दयाला ने दिल्ली में शहादत पाई वही अजीत सिंह , बाबा जुझार सिंह, जोरावर सिंह, फतेह सिंह, गुजर कौर, जीवन सिंह जैता व 40 सिखों ने लाखों की संख्या में मुगल सेना का सामना किया था. (नीचे पढ़ें पूरी खबर)
शहादत को नमन करने के लिए स्त्री सत्संग सभा, सुखमणि साहिब जत्था ने पाठ का सराहनीय कार्यक्रम किया है. पूरे विश्व की मंगल कामना, असहिष्णुता प्रेम दया क्षमा का राज स्थापित् करने की अरदास वाहेगुरु से बाबा करतार सिंह ने की। महासचिव दलबीर सिंह, महेंद्र सिंह स्त्री सत्संग सभा प्रधान गुरमीत कौर, प्रधान अमरजीत कौर महासचिव बलविंदर कौर भुर्जी, सुरेंद्र कौर मारवाह, गुरमीत कौर सिद्धू, राज कौर, अमरजीतसेंट्रल स्त्री सत्संग सभा चेयरपर्सन कमलजीत कौर, दलबीर कौर, पिंकी कौर, मनजीत कौर, सुरजीत कौर, नरेंद्र कौर, पॉली कौर, अवतार कौर आदि की सराहनीय भूमिका रही.





