
गुड़ाबांदा : गुड़ाबांदा प्रखंड पहले नक्सलवाद के रूप में पहचान बनाने वाले क्षेत्र अब सेब की खेती होने से यह क्षेत्र अपनी एक अलग पहचान बना रही है. प्रखंड के सिंहपुरा गांव निवासी टिंकू महतो पहले तो पढ़-लिख कर सरकारी नौकरी पाने की चाह रखता था. उसने बीटेक फर्स्ट इयर पास कर सेकंड ईयर में पढ़ाई छोड़ कर गांव में नई तकनीक अपनाकर सेब की खेती कर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. टिंकू महतो ने कहा कि उसे सेब की खेती करने की प्रेरणा यूट्यूब से मिली. बताया कि वह यूट्यूब पर सेब की खेती करने की पद्धति देखकर काफी प्रेरित हुआ और हरिमन शर्मा से हिमाचल प्रदेश से कुरियर से सेब के पौधे लगाकर खेती की. उन्होने बताया कि उसने प्रति पौधा 80 रूपय में खरीदा था. (नीचे भी पढ़ें)
महतो ने अपने एक एकड़ जमीन पर सेब की खेती की है. खेती करने में विगत दो वर्षो में खाद, पौधा और चहारदीवारी (तार और पिलर से खेरा बंदी) बनवाने में अब तक 70-80 हजार रुपए खर्च हुआ है. विगत दो वर्षो से इन्वेस्ट ही हुआ है अभी तक लाभ नहीं हुआ है. पिछले वर्ष सेब की पौधों में सेब फला था उस सेब को उसने अपने गांव के हर परिवार को खिलाया था. सेब काफी मीठा था, इस वर्ष भी पौधों में फूल आ रहे हैं और जून- जुलाई में पौधों में फल आ जाएंगे. सेब की खेती कर लाभान्वित हो सकते हैं, एक एक पौधे सात आठ साल बाद एक -एक क्विंटल फल होंगे और पौधा 100 साल तक जीवित रहता है. टिंकू महतो ने कहा कि वह आगे और भी अन्य फल की खेती करना चाहता है. उसने क्षेत्र के लोगों से भी अपील किया है कि वे भी यूट्यूब से फल की खेती करने की जानकारी प्राप्त कर फल की खेती कर लाभान्वित हो सकते है.




