जमशेदपुर : नई शिक्षा नीति को धरातल पर उतारने में वक्त लगेगा लेकिन व्यहारिक धरातल पर इसके कितने सुखद परिणाम आ सकते हैं इसकी एक झलक जमशेदपुर के टेल्को के लिटिल फ्लावर स्कूल में देखने को मिली है. यहां कक्षा 6 से 8 के बच्चों ने चार महीनों तक 10 घंटों की बैगलेश ट्रेनिंग के तहत वोकेशनल ट्रेनिंग पाकर न सिर्फ अपनी प्रतिभा को निखारा है बल्कि स्कूल के दिनों से ही करियर चुन लिया है. स्कूल की मदद से तय किए गए करियर को लेकर बच्चे मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे. (नीचे भी पढ़ें)

स्कूल में जुलाई से वोकेशनल ट्रेनिंग कम वर्कशॉप का कार्यक्रम शुरू हुआ था जो नवंबर तक चला. इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों के एक्सपर्ट ने अपने अपने क्षेत्र के लेकर बच्चों को न सिर्फ प्रशिक्षण दिया बल्कि करियर को लेकर गाईडेंस दिया.उन्हें जानकारी दी कि उस फील्ड में जाने के लिए किन संस्थानों में पढ़ाई करनी होगी.इस दौरान कक्षा 6 से कक्षा 8 तक के 460 बच्चों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया.इस कार्यक्रम के लिए 15 शिक्षक-शिक्षिकाओं की टीम बच्चों के साथ रही और उन्हें सहयोग किया. (नीचे भी पढ़ें और वीडियो देखें)

आज इस कार्यक्रम के समापन समारोह के अंतर्गत शुक्रवार को सभी विषयों के एक्सपर्टों, शिक्षक-शिक्षिकाओं औऱ बच्चों को एलएफएस के ऑडिटोरियम में बुलाकर उन्हें प्रोत्साहित किया गया. मुख्य अतिथि एलएफएस की पूर्व सीनियर साईंस शिक्षिका दियाली सेनगुप्ता और टाटा कमिंस के एचआर हेड मनीष जैन ने बच्चों को सर्टिफिकेट प्रदान किए.वहीं एक्टपर्ट(रिसोर्स पर्सन) के तौर पर प्रीति झा, प्रियाज्योति मुखर्जी, टाटा पावर के मनीष तिवारी, विकास, संगीता किशोर और अन्य लोग उपस्थित थे. (नीचे भी पढ़ें और वीडियो देखें)

इस दौरान प्राचार्या सिस्टर हिल्डा ने कार्यक्रम की परिकल्पना औऱ रूपरेखा को लेकर शिक्षिका सह काउंसलिर रनिता कर्मकार की प्रशंसा की. वहीं रनिता कर्मकार ने बताया कि काउंसिल की एक बैठक के दौरान नई शिक्षा नीति पर चर्चा हुई थी जिसमें बताया गया था कि नई नीति के तहत छात्रों के प्रतिभाओं को शुरू से ही पहचानने की कोशिश होगी. प्रतिभा पहचान कर उसका विकास किया जाएगा. छात्रों को उनकी प्रतिभा पहचानने में मदद की जाएगी.इसके लिए शिक्षक मार्गदर्शन देंगे.बैठक में हुई इस चर्चा के आलोक में स्कूल प्रबंधन के साथ मिलकर इस वोकेशनल ट्रेनिंग कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार हुई. (नीचे भी पढ़ें और वीडियो देखें)

कौन कौन से विषयों को लेकर वोकेशनल ट्रेनिंग बच्चों को दी गई, जहां बच्चों ने बैगलेश होकर प्रशिक्षण पाया—आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस, ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रीकल टेक्नोलॉजी, डिजाइनिंग, हैंडीक्राफ्ट, हॉर्टीकल्चर, मास मीडिया. (नीचे भी पढ़ें और वीडियो देखें)

इन सात विषयों को लेकर उस क्षेत्र के एक्सपर्टों को बुलाया गया. जुलाई से लेकर नवंबर तक आयोजित हुए इस वोकेशनल ट्रेनिंग में बच्चों ने ऑटोमोबाईल सेक्टर से लेकर डिजाईनिंग, हैंडीक्राफ्ट से लेकर मास मीडिया तक का प्रशिक्षण बैगलेश होकर लिया. यह उनके लिए अनोखा अनुभव था. साथ ही कक्षा छह से आठ के दौरान ही बच्चों को ये समझ आया कि उनके भीतर क्या प्रतिभा है और किस क्षेत्र में उनकी दिलचस्पी है. (नीचे भी पढ़ें और वीडियो देखें)
कुछ बच्चों ने ऑटोमोबाईल टेक्नॉलोजी का वोकेशनल ट्रेनिंग लेकर अद्भुत मॉडल बनाए. वहीं डिजाईनिंग और हैंडीक्राफ्ट में भी बच्चों ने कमाल दिखाया. मास मीडिया के वोकेशनल ट्रेनिंग के दौराम बच्चों ने मास मीडिया के विभिन्न सेक्टरों रिपोर्टिंग, एडीटिंग, एडवर्टाईजिंग वगैरह के बारे में जानकारी प्राप्त की. वे इस क्षेत्र से जुड़े संस्थानों और चुनौतियों से भी परिचित हुए. बच्चों ने सभी सेक्टरों को उसकी अच्छाईयों और चुनौतियों दोनों के ही रूप में जाना ताकि आगे चलकर वे समझ सकें कि खुद को किस करियर की तऱफ ले जाना है. (नीचे भी पढ़ें और वीडियो देखें)
इस वोकेशनल कार्यकर्म की रूपरेखा औऱ परिकल्पना शिक्षिका सह काउंसिलर रनिता कर्माकर की रही थी. वहीं चार महीने तक चले इस वोकेशनल बैगलेश ट्रेनिंग को सफल बनाने में शिक्षक-शिक्षिकाएं-शुभेन्दु पॉल, तनुश्री मुखर्जी, दिव्योज्योति घोष, सोनिका वर्मा, अनुपमा कुमार, रविन्दर कौर, सुदेशना दत्ता, ग्लोरिया वेन, शार्मिन जेवियर, प्रभात तिवारी, बिप्लव रॉय, मौमिता मुखर्जी, बिंदु अब्राहम, निर्मला भगत और जैकब मकार्डी का खासा योगदान रहा.



