रांची: होली के बाद विधानसभा का बजट सत्र आज से शुरू हो रहा है. सदन काफी हंगामेदार चल रहा है. आज की कार्यवाही में विधानसभा में 60-40 नाय चलतो, 1932 की भेलो का नारा गूंज रहा है.भाजपा विधायक वेल में जाकर विरोध कर रहे हैं और नारेबाज़ी कर रहे हैं. इसी बीच स्पीकर सदन को 12:30 बजे तक के लिए स्थागित कर दिया है.बजट सत्र के दौरान नियोजन नीति को लेकर भाजपा विधायकों का विरोध प्रदर्शन लगातार रहा. मंगलवार को भी भाजपा विधायकों 60-40 नाय चलतौ का नारा लगाए. सत्र की कार्यवाही शुरू होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष को खतियानी जोहार कहा. इसके बाद सभी भाजपा विधायक वेल में आकर प्रदर्शन करने लगे. (नीचे भी पढ़े)
और नारे लगाते हुए कहा कि बिहारी मंत्री नाय चलतो, नियोजन नीति वापस लो. मंगलवार को भाजपा विधायकों की एक बात खास रही कि वे लोग 60-40 नाय चलतौ लिखा टी शर्ट पहनकर विधानसभा पहुंचे थे. और उसी टी- शर्ट में विधानसभा के मुख्य गेट पर विरोध प्रदर्शन किया.इस दौरान भाजपा विधायक मनीष जायसवाल ने कहा कि नियोजन नीति को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है. इस मामले पर राज्य में गतिरोध कायम रहे और युवा दर दर भटकते रहे, सरकार इस पर काम कर रही है. सरकार युवाओं के साथ छलावा कर रही है. हर बार उनके साथ धोखा किया जा रहा है. सरकार पिछले दरवाजे से नियोजन नीति ला रही है, जबकि सत्र चल रहा है तो इस नीति को पहले सदन में लाना चाहिए था.(नीचे भी पढ़े)
14 हजार रुपये में कलाकारों को मिल सकता है ऑड्रे हाउस सभागार
राज्य सरकार के मुताबिक राज्य के लोक और अन्य कलाकारों को अपने हुनर दिखाने को ऑडिटोरियम की चिंता नहीं करनी है. राजधानी रांची में रहनेवाले कलाकारों को शहर से दूर जाकर ऑडिटोरियम बुक करने का मसला सरकार के ध्यान में लगातार रहा है. 14 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से गवर्नर हाउस, रांची के समीप स्थित ऑड्रे हाउस ऑडिटोरियम के अलावा मुक्ताकाश मंच का आरक्षण सस्ते दरों पर संभव है. विधायक राज सिन्हा ने पर्यटन, कला संस्कृति विभाग, झारखंड से चालू बजट सत्र के दौरान कलाकारों को सस्ते दरों पर ऑडिटोरियम की सुविधा दिए जाने और कलाकारों द्वारा महंगे दरों पर बुकिंग की शिकायत के मसले पर जानकारी मांगी थी. इस पर विभाग ने बताया है कि सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, झारखंड के स्तर से ऑड्रे हाउस के ऑडिटोरियम के अलावा मुक्ताकाश मंच का आरक्षण शुल्क 2017-18 से ही नहीं बढ़ाया गया है.(नीचे भी पढ़े)
झारखंड के विश्वविद्यालयों में 40 फीसदी से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली
मंगलवार को सदन में माले विधायक विनोद सिंह ने सदन में राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों में 300 से ज्यादा जेआरएफ पास अभ्यर्थियों को शिक्षकों के अभाव में शोध निदेशक नहीं मिल रहे हैं. वहीं विश्वविद्यालयों में स्वीकृत पदों के 40 फीसदी से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली हैं.इस मामले में मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने जवाब देते हुए कहा, यह सही है कि राज्य के विश्वविद्यालयों में 40 फीसदी से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली हैं. लेकिन शोध निदेशकों का अभाव नहीं है. उन्होंने बताया कि रांची यूनिवर्सिटी में जेआरएफ पास अभ्यर्थियों की संख्या 142 है, जबकि शोध निदेशक 92 हैं. (नीचे भी पढ़े)
वहीं विनोबा भावे यूनिवर्सिटी में जेआरएफ पास अभ्यर्थियों की संख्या 88 है. जबकि शोध निदेशकों की संख्या 42 है. सिद्धो कान्हो मुर्मू यूनिवर्सिटी में जेआरएफ पास अभ्यर्थियों की संख्या 19 है, जबकि शोध निदेशकों की संख्या 63 है. शोध निदेशकों की राज्य में कमी नहीं है. जहां तक बात विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति का है, तो इसके लिए राज्य सरकार ने विश्वविद्यालयों के मुख्यालय और अंगीभूत कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय को ईकाई मानकर आरक्षण रोस्टर क्लीयरेंस की प्रक्रिया का प्रस्ताव कार्मिक विभाग को भेजा है.(नीचे भी पढ़े)
पूर्व स्पीकर को सरकारी आवास सहित अन्य सुविधा देने के लिए बनेगी कमिटी
सदन में भोजनावकाश के बाद पूर्व स्पीकर और भाजपा विधायक सीपी सिंह ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष को सरकारी मकान समेत अन्य सुविधा देने का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि संसदीय परंपरा के अनुसार स्पीकर के चुनाव के समय कोई राजनीतिक दल कैंडिडेट खड़ा नहीं करता है. उन्होंने कहा कि कई राज्यों में यह व्यवस्था है कि पूर्व स्पीकर को कई सरकारी सुविधाएं दी जाती हैं. उन्होंने पूर्व स्पीकर को एक सरकारी आवास, एक सहायक और एक चालक देने की मांग की और इसके लिए एक कमिटी बनाने की भी मांग की. इस पर संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने सदन को जानकारी दी कि दूसरे राज्यों में पूर्व स्पीकर को सुविधा देय है. इस पर उन्होंने कमिटी बनाने पर स्पीकर से आग्रह किया. स्पीकर रविन्द्र नाथ महतो ने भी कमिटी बनाने पर सहमति प्रदान की.



