जमशेदपुर : जिला केंद्रीय शांति समिति के सदस्य रियाजुद्दीन खान ने जमशेदपुर के शास्त्रीनगर के सांप्रदायिक उन्माद पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रण में कर लिया और बड़ा सांप्रदायिक दंगा होने से जमशेदपुर शहर को बचा लिया और जमशेदपुर को जलने से बचा लिया इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं. 9 अप्रैल संध्या बेला में अचानक उपद्रवियों द्वारा दो हजार से तीन हजार की संख्या में जो सांप्रदायिकता का नंगा नाच किया गया. इसकी जितनी निंदा की जाए कम है परंतु प्रशासन की सूझबूझ और शहर की अमन पसंद जनता द्वारा इस को तूल नहीं देने के कारण यह सिर्फ शास्त्रीनगर तक ही सीमित रह गया और वहां भी प्रशासन ने काफी सक्रियता और तत्परता दिखा कर 2 से 3 घंटे के अंदर पूरी स्थिति को नियंत्रण में ले लिया. यह अलग बात है कि मामला जब बहुत भयानक हो जाता है तो जाने अनजाने में पुलिस को भी अच्छे और बुरे की पहचान करने में दिक्कत आती है और कभी कभी गेहूं के साथ घुन भी पिसा जाता है ऐसा प्रशासन जानबूझकर नहीं करता है, परंतु संपूर्ण घटनाक्रम को अगर निष्पक्षता से देखें तो पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन की भूमिका सराहनीय रही है. पुलिस प्रशासन ने इस बात का पूरा प्रयास किया है कि जो दोषी हैं सिर्फ उन्हीं पर कार्यवाही हो और जो निर्दोष हैं उनको परेशान नहीं किया जाए और यही कारण है कि जो प्रशासन की नजर में दोषी थे उन पर कार्रवाई हुई और जो जांच के बाद निर्दोष पाए गए उन्हें छोड़ दिया गया और उन्हें पूर्ण विश्वास है कि जांच के क्रम में आगे भी अगर कोई निर्दोष पाए जाएंगे तो प्रशासन उनके ऊपर जरूर नरम रवैया अख्तियार करेगी. (नीचे भी पढ़ें)
रियाजुद्दीन खान ने कहा कि समय रहते स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया. केंद्रीय शांति समिति के सदस्य रियाजुद्दीन खान ने जमशेदपुर की आम जनता से अपील की के वे अफवाहों पर ध्यान ना दें, सोशल मीडिया के दुरुपयोग से बचें और अगर किसी तरह कि कोई अप्रिय सूचना कहीं से मिलती है तो उसे तुरंत प्रशासन और शांति समिति तथा स्थानीय थाना के संज्ञान में लाएं ताकि समय पर उस पर काबू पाया जा सके और असामाजिक तत्वों के नापाक मंसूबे पर लगाम लगाई जा सके. जमशेदपुर मजदूरों का शहर है और मजदूरों की एक ही जाति होती है वह है मजदूर जाति और इनका एक ही धर्म होता है वह मानव धर्म है. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने कहा कि इसलिए हम सब का कर्तव्य होता है कि हर हाल में मानव धर्म की रक्षा करें और मानवता को शर्मसार होने से बचाएं यह जमशेदपुर शहर पूर्व में 1964 और 1979 के दंगों की मार झेल चुका है और यह देख चुका है कि इस तरह के सांप्रदायिक दंगों का दुष्परिणाम यही होता है के रोज खाने कमाने वाले मजदूरों की रोजी-रोटी पर बुरा असर पड़ता है, विद्यालय और महाविद्यालय बंद हो जाते हैं और पढ़ाई का नुकसान होता है. दुकान प्रतिष्ठान बंद होने से रोजमर्रा की चीजों का मिल पाना दुर्लभ हो जाता है. कालाबाजारी और मुनाफाखोरी अपना पैर फैला लेती है, जिससे रोजमर्रा की जरूरत की चीजें महंगी और पहुंच से दूर हो जाती हैं. अतः शहर में सामान्य स्थिति बनी रहे इसके लिए वे सभी के साथ मिलकर समाज और देश की भलाई करें. आम जनता को हर तरह की गंदी राजनीति से बचना है और स्वस्थ एवं सभ्य समाज बनाए रखने में अपनी सार्थक भूमिका निभाते रहना है.



