अनिल कुमार/बोकारो : बोकारो जिला समाहरणालय के पीछे करीब डेढ़ करोड़ की लागत से बना सरकारी बर्न यूनिट पांच साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है. बर्न यूनिट नहीं होने से बोकारो जिले के निवासियों को बर्न केस के मरीजों को बोकारो जेनरल अस्पताल या निजी अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ता है. प्रस्तावित बर्न यूनिट के भवन में फिलहाल कोरोना टीकाकरण केंद्र चल रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
बर्न यूनिट नहीं शुरू हो पाने से सबसे अधिक मुश्किल गरीबों और आम जन को है, जो इलाज कराने में सक्षम नहीं हैं. यदि सदर अस्पताल में कोई बर्न का मरीज पहुंच जाए तो उसे प्राथमिक उपचार कर दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है. सवाल है कि बर्न यूनिट का भवन पांच साल से बन कर तैयार है. आखिर क्या वजह है कि इसे शुरू करने के लिए अब तक ना जिला प्रशासन ने और ना ही किसी जन प्रतिनिधि ने पहल की है. इस बीच तैयार भवन में दरार भी आनी शुरू हो गई है. (नीचे भी पढ़ें)
जानकारी के मुताबिक सदर अस्पताल में हर माह बर्न के करीब सात-आठ मरीज पहुंचते हैं. मालूम हो कि तीन-चार दिन पहले सदर अस्पताल में बर्न केस का एक मरीज पहुंचा. इलाज की व्यवस्था नहीं होने के कारण प्राथमिक उपचार कर उसे छोड़ दिया गया. मरीज की स्थिति देख कर परिजन निजी अस्पताल में ले गये, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी. (नीचे भी पढ़ें)
बताते चलें कि बर्न यूनिट के संवेदक ने उक्त भवन दिसंबर 2018 में ही स्वास्थ्य विभाग के सुपुर्द कर दिया था. जानकार बताते हैं कि इस यूनिट को वर्ष 2016 में ही झारखंड स्थापना दिवस पर प्रारंभ किया जाना था, जो अब तक शुरू नहीं हो पाया है. फिलहाल इस भवन का इस्तेमाल कोरोना टीकाकरण केंद्र एवं सहियों की कलस्टर मीटिंग लिए किया जा रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
बोकारो के लोगों का कहना है कि बर्न यूनिट को जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए, क्योंकि जिले को इसकी जरूरत है. वर्षों से बंद पड़े इस भवन को लेकर सरकार की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. वहीं बोकारो चैंबर ऑफ कॉमर्स के संरक्षक संजय वैद्य ने कहा कि गरीबों के लिए बर्न यूनिट का शुरू होना जरूरी है, क्योंकि अमीर लोग कहीं भी जाकर इलाज करा लेते हैं, लेकिन गरीब खर्च अधिक होने के कारण इलाज नहीं करा पाते. ऐसे में उन्होंने मुख्यमंत्री व जिला प्रशासन से भवन में जल्द से जल्द बर्न यूनिट शुरू कराने की मांग की. (नीचे भी पढ़ें)
बोकारो के सिविल सर्जन डॉ अभय भूषण प्रसाद ने कहा कि पूरे राज्य में इस तरह की बर्न यूनिट के लिए भवन बने हुए हैं, लेकिन उपकरण सहित अन्य व्यवस्था नहीं हो पाने के कारण यूनिट शुरू नहीं हो पा रही हैं. इसका फैसला राज्य सरकार के स्तर से होना है. अगर बर्न यूनिट शुरू हो जायें तो गरीब मरीजों को काफी सहूलियत होगी, क्योंकि बर्न केस में खर्च काफी अधिक आता है. निर्णय सरकार को लेना है.




