सरायकेला : जिले के 114 स्कूलों के किचन स्टोर की मरम्मत के लिए जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा जारी निर्देश पर आपत्ति जताते हुए झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने इस पर पुनर्विचार किये जाने की मांग की है. बता दें कि प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत जिले के 114 विद्यालयों को किचन स्टोर की मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण से संबंधित कार्यों के लिए आवंटन प्राप्त हुआ है. इसमें कहा गया है कि बीते 6 जून 23 को संबंधित प्रभारियों के साथ बैठक में जिला शिक्षा अधीक्षक ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि संबंधित विद्यालय प्रभारी अपने पैसे से योजना का काम पूरा कराने के बाद क्रियान्वित योजना के फोटोग्राफ के साथ उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रखंड कार्यालय में जमा करेंगे. प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, कनीय अभियंता एवं जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा तकनीकी अनुमोदन के पश्चात उन्हें राशि निर्गत की जाएगी. योजना क्रियान्वयन की ऊपर वर्णित प्रणाली पर शिक्षक समूह तथा संगठन ने घोर आपत्ति जतायी है.(नीचे भी पढ़ें)
अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने इस संबंध में जिला शिक्षा अधीक्षक के संबंधित आदेश पर आपत्ति जताते हुए इस पर पुनर्विचार की मांग करते हुए डीएसई को मांग पत्र सौंपा है. मांग पत्र के माध्यम से संघ ने बताया है कि सर्व शिक्षा अभियान के प्रारंभिक काल से हजारों स्कूल भवनों का निर्माण तथा मरम्मत का कार्य शिक्षकों की देखरेख में सफलतापूर्वक हो चुका है, किन्तु आज तक शिक्षकों ने कभी अपने पॉकेट से पैसा लगाकर योजना का क्रियान्वयन नहीं किया. कार्य प्रारंभ करने से पूर्व अग्रिम के रूप में एक मोटी रकम विद्यालय प्रबंधन समिति के बैंक खाते में हस्तांतरित कर दी जाती रही है एवं कार्य की प्रगति के आधार पर शेष राशि आवंटित की जाती रही है. संघ ने इसको लेकर जिला शिक्षा अधीक्षक को तीन सूत्री मांग पत्र सौंपा है, जिसमें संघ ने कहा है कि प्रभारी शिक्षक विभागीय योजना के क्रियान्वयन के लिए संवेदक के रूप में चिह्नित नहीं है तथा योजना में संवेदक को वित्तीय लाभ देने का प्रावधान भी नहीं है. ऐसी स्थिति में प्रभारी शिक्षक कोई आर्थिक जोखिम क्यों लेगा.(नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने कहा है कि पारिवारिक खर्चों, बच्चों की उच्च शिक्षा एवं गृह निर्माण, बैंक लोन आदि के भुगतान के बाद महीने के अंत में शिक्षकों के बैंक खाते में नहीं के बराबर राशि बचती है. ऐसे में शिक्षक योजना के क्रियान्वयन के लिए कहां से धन लाएंगे. साथ ही वर्तमान व्यवस्था में योजना के क्रियान्वयन के बाद उसकी राशि विमुक्त कराने में भ्रष्टाचार की प्रबल संभावना बनी रहेगी. प्रभारियों को अपनी जमा पूंजी की वापसी के लिए स्कूल की पढ़ाई छोड़कर प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, कनीय अभियंता तथा जिला शिक्षा अधीक्षक के कार्यालय के चक्कर काटने पड़ेंगे.(नीचे भी पढ़ें)
संघ ने उक्त कार्य के निष्पादन में संभावित परेशानियों को देखते हुए प्रासंगिक पत्र पर आपत्ति जताते हुए पुनर्विचार की मांग की है. साथ ही चेतावनी दी है कि सकारात्मक पुनर्विचार नहीं होने की स्थिति में शिक्षक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन के लिए मजबूर हो सकते हैं. ज्ञापन देने जानेवालों में प्रदेश उपाध्यक्ष दीपक दत्ता, जिला अध्यक्ष मानिक प्रसाद सिंह, महासचिव सुदामा मांझी, उपाध्यक्ष मनोज सिंह, देवेंद्र नाथ साहू, संगठन सचिव बलराज हांसदा, सोमेन दास आदि शिक्षक शामिल रहे.




