कांड्रा : कांड्रा व आसपास के क्षेत्रों में विगत तीन-चार महीनों से जारी बिजली की आंख मिचौनी के खिलाफ कांड्रा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों का आक्रोश फूट पड़ा है. गुरुवार देर शाम 5 पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति में कांड्रा स्थित पंचायत भवन में बैठक हुई, जिसका संचालन समाजसेवी राम महतो ने किया. सर्वदलीय बैठक में बिजली विभाग की लापरवाही और उदासीनता के खिलाफ लोगों ने जमकर आक्रोश व्यक्त किया और बिजली विभाग को सारी व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया, अन्यथा हजारों की संख्या में लोगों के साथ विभाग के कार्यालय पहुंचकर कार्यालय को अनिश्चितकालीन जाम करने की चेतावनी भी दी.(नीचे भी पढ़ें)
सर्वदलीय बैठक में झारखंड मुक्ति मोर्चा, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, आजसू , राजद सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग मौजूद रहे. सभी वक्ताओं ने एक स्वर से कहा कि एक लंबे समय से कांड्रा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे में से महज चार-पांच घंटे ही बिजली सप्लाई हो पा र000ही है. ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालात और भी बुरे हैं. जहां 3- 4 दिन बिजली रानी के दर्शन ही नहीं होते है. इससे आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है. लोग शुद्ध पेयजल और बिजली के लिए त्राहिमाम कर रहे हैं. इससे खासकर स्कूली बच्चे की पढ़ाई भी बुरी तरह प्रभावित हुई है. कई बार शिकायत करने के बावजूद बिजली विभाग का उदासीन रवैया जारी है और ग्रामीणों की मांग को विभाग के अधिकारी अनसुना कर दे रहे हैं. पूर्व में ही विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था में सुधार लाने के लिए विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को चेताया गया था, लेकिन इसका भी कोई असर नहीं पड़ा. जिसका परिणाम है कि बिजली की लुकाछिपी का खेल निरंतर जारी है.(नीचे भी पढ़ें)
सर्वदलीय बैठक में स्थानीय लाइनमैन को भी आमंत्रित किया गया और उससे विद्युत आपूर्ति में आ रही कठिनाई के बारे में जानकारी ली गई. लाइनमैन ने बताया कि 10-12 ब्रेकर की स्थिति काफी खराब है जिसके कारण बार-बार विद्युत आपूर्ति बाधित होती है. इन्हें अगर बदल दिया जाए तो बिजली की निर्बाध आपूर्ति हो सकेगी. बैठक में विद्युत विभाग के उच्चाधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराने का निर्णय लिया गया. इसके बाद अगर 48 घंटे में इसका समाधान नहीं हुआ तो लोग मजबूरन विभाग का कार्यालय जाम करेंगे.(नीचे भी पढ़ें)
बता दें कि विद्युत आपूर्ति की लचर व्यवस्था को लेकर ग्रामीण भीतर ही भीतर बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे थे, लेकिन हद तो तब हो गई जब विगत पांच दिनों से महज दो- तीन घंटे ही बिजली आपूर्ति हो रही थी. इससे लोगों में तीव्र आक्रोश व्याप्त हो गया और सर्वदलीय बैठक का आयोजन कर लोगों ने अपने इरादे जता दिए हैं. अब गेंद बिजली विभाग के पाले में है और देखना है कि बिजली विभाग एक बड़े जन आंदोलन का सामना करने को कमर कसता है या लचर विद्युत व्यवस्था सुधारने के प्रति संवेदनशील होता है.




