रांची : टाटा कमिंस की ओर से हाइड्रोजन इंजन बनाने के लिए जमशेदपुर प्लांट में नयी कंपनी की स्थापना की जा रही है. इसका नाम टीसीपीएल जीईएस रखा गया है. इसकी स्थापना को लेकर शुक्रवार को झारखण्ड सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया. राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में यह एमओयू हुआ. इस अनुबंध का उद्देश्य मोबिलिटी समाधानों के लिए न्यूनतम-से-शून्य उत्सर्जन तकनीकों का उत्पादन करने के लिए एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करना है. ज्ञातव्य है कि टीसीपीएल जीईएस, टाटा कमिंस प्राइवेट लिमिटेड (टीसीपीएल) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है, जो कि टाटा मोटर्स लिमिटेड और कमिंस इंक. यूएसए का 50-50 पार्टनरशिप का संयुक्त उपक्रम है. एमओयू पर झारखण्ड सरकार के उद्योग विभाग के सचिव जितेंद्र कुमार और भारत में कमिंस ग्रुप के मुख्य वित्तीय अधिकारी अजय पाटिल ने झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, टाटा मोटर्स के कार्यकारी निदेशक गिरीश वाघ और कमिंस इंडिया में इंजन व्यवसाय के उपाध्यक्ष नितिन जिराफे की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए. यह सहयोग जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत के पंचामृत तत्व के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और कार्बन के कम उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने की दिशा में झारखण्ड सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप है. (नीचे भी पढे़ं)
झारखण्ड भारत में वाणिज्यिक वाहन उद्योग के लिए उन्नत तकनीकी उत्पादों के निर्माण के दरवाजे खोलने वाले भारत के पहले राज्यों में से एक होगा, जो देश के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में योगदान देगा. हाइड्रोजन इंटरनल कम्बशन इंजन, बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल सिस्टमस, फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल सिस्टमस और फ्यूल डिलीवरी सिस्टमस समेत ईंधन-एगनॉस्टिक पावरट्रेन समाधान का उत्पादन करने के लिए टीसीपीएल जीईएस द्वारा अगले कुछ वर्षों में 350 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा. भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा तकनीकियों में निवेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, अत्याधुनिक उत्पादन केंद्र टाटा मोटर्स और कमिंस इंडिया की मेक इन इंडिया पहल और भारत को आत्मनिर्भर बनाने की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है. अन्य सभी कमिंस केंद्रों की तरह, टीसीपीएल जीईएस साइट क्रश, स्वच्छ और हरित मैन्युफैक्चरिंग का अनुपालन करेगी. इस संयंत्र में 2024 से चरणबद्ध तरीके से उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है. वर्तमान योजनाओं के अनुसार, हाइड्रोजन इंटरनल कम्बशन इंजन पहले लांच किया जाएगा, उसके बाद बैटरी इलेक्ट्रिक कंपोनेंट्स और फ्यूल डिलीवरी सिस्टमस से संबंधित उत्पाद पेश किए जाएंगे. यह निवेश मजबूत आपूर्ति पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए एक प्रमुख उद्यम का निर्माण करेगा. इससे राज्य के कुशल युवाओं को नई तकनीकों और नई प्रक्रियाओं पर काम करने का एक बड़ा अवसर मिलेगा और यह 300 से अधिक युवाओं के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद करते हुए राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए एक दिशानिर्देशक के रूप में कार्य करेगा.
हाइड्रोजन इंटरनल कम्बशन इंजन
हाइड्रोजन इंटरनल कम्बशन इंजन में मध्यम और भारी ट्रक निर्माताओं के लिए लगभग शून्य-कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने की दिशा में सबसे व्यावहारिक समाधान बनने की क्षमता है. हाइड्रोजन फ्यूल सेल
भविष्य की तकनीक के रूप में आंकी गई, हाइड्रोजन फ्यूल सेल पावरट्रेन शून्य-उत्सर्जन बिजली समाधान प्रदान करती है. जो ग्राहक शून्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की इच्छा रखते हैं, उनके लिए ईंधन के रूप में हरित हाइड्रोजन के साथ आपूर्ति किए जाने पर हाइड्रोजन फ्यूल सेल एक उपयुक्त समाधान होगा. कमिंस इंक ने डीप ड्यूटी साइकल और एप्लिकेशन अनुभव के आधार पर न्यू-जनरेशन के बैटरी पैक समाधान विकसित किए हैं. बैटरी से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण मापदंडों और उसके समाधान तथा बैटरी के जीवन और उसके प्रदर्शन में सुधार के लिए बैटरियाँ एक उन्नत बैटरी प्रबंधन प्रणाली (बीएमएस) से लैस होंगी. टीसीपीएल जीईएस प्लांट बैटरी इलेक्ट्रिक घटकों के निर्माण के लिए कमिंस के वैश्विक अनुभव का प्रयोग करेगा. हाइड्रोजन भंडारण क्षमताएं प्रदान करने से हमें वाणिज्यिक बाजारों में हाइड्रोजन संचालित तकनीकों की व्यवहार्यता और अपनाने में तेजी लाने में मदद मिलेगी. यह संयंत्र फ्यूल डिलीवरी सिस्टम्स का निर्माण संयोजन या असेंबल करने का काम करेगा.
टाटा मोटर्स और झारखंड सरकार ने क्या कहा
सतत और समावेशी तरीके से राज्य के विकास को बढ़ावा देने का संकल्प व्यक्त करते हुए, झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अपनी लड़ाई में उल्लेरखनीय प्रगति कर रहा है. टीसीपीएल जीईएस के साथ सहयोग वर्ष 2070 तक देश के नेट- ज़ीरो लक्ष्य को प्राप्त करने और खुद को नए तकनीकी विकास के केंद्र के रूप में स्थापित करने की झारखण्ड की प्रतिबद्धता का हिस्सा है. यह हमारे युवाओं के कौशल को बढ़ाने और सशक्त बनाने तथा उन्हें अत्याधुनिक उद्योग में योगदान करने का अवसर प्रदान करने का भी एक प्रयास है. यह संयंत्र रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद करेगा और इस प्रकार राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान देगा. इस अवसर पर बोलते हुए, टाटा मोटर्स के कार्यकारी निदेशक, गिरीश वाघ ने कहा कि 1945 में जमशेदपुर में परिचालन शुरू करने के बाद से, टाटा मोटर्स ने राष्ट्र निर्माण की दिशा में अपने प्रयास में नई खोजों और उद्योग की एक समृद्ध विरासत स्थापित की है. आज भविष्य के लिए तैयार टिकाऊ मोबिलिटी समाधान तैयार करने के लिए झारखण्ड के लोगों और सरकार के साथ हमारी साझेदारी का एक और महत्वपूर्ण अवसर है. स्थापित की जा रही अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग सुविधा नेक्स्ट-जेन तकनीकों का उपयोग करके हाइड्रोजन-आधारित पावरट्रेन और बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन एग्रीगेट्स और सिस्टम का उत्पादन करेगी. ये उन्नत समाधान आने वाले वर्षों में ग्राहकों को उत्सर्जन मुक्त, व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य कार्गो और बड़े पैमाने पर मोबिलिटी में परिवर्तन करने में सक्षम बनाकर भारत में गतिशीलता के भविष्य को आकार देंगे. इस अवसर पर बोलते हुए कमिंस ग्रुप इन इंडिया के सीएफओ, अजय पाटिल ने कहा किजमशेदपुर में 30 से अधिक वर्षों के प्रत्यक्ष विनिर्माण अनुभव के साथ, हमारे पास हेवी-ड्यूटी अनुप्रयोगों की गहरी समझ है और हम वाणिज्यिक वाहन उद्योग को क्लीन पावरट्रेन में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक कड़ी मेहनत का स्पष्ट दृष्टिकोण रखते हैं. हम भारत को उत्सर्जन मुक्त राष्ट्र की ओर ले जाने के लिए साहसिक कदम उठाने के लिए झारखण्ड सरकार की सराहना करते हैं. हमारी डेस्टिनेशन ज़ीरो रणनीति के अनुरूप, यह समझौता ज्ञापन शून्य उत्सर्जन के हमारे पथ पर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, और बेहतर कल के लिए आज उत्सर्जन कम करने में योगदान करने का अवसर देने के लिए हम झारखण्ड सरकार के आभारी हैं.





