पटना: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए और महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर खींचतान खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. एनडीए खेमे में कभी चिराग पासवान को कभी उपेंद्र कुशवाहा व जीतनराम मांझी टेंशन बढ़ा रहे है. जबकि बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का नामांकन शुरू हो चुका है, लेकिन सीट शेयरिंग का मामला अब भी पेंच में फंसा हुआ है. इसी तरह महागठबंधन का हाल भी कमोवेश यहीं है, कभी माकपा के जी राजा, तो कभी मुकेश सहनी,तो कभी माले टेंशन बढ़ा रहे है. कांग्रेस की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं है, वह सम्मानजनक सीट की बातें कर रही है. राजद के जिम्मे में कांग्रेस ने गेंद डाल दिया है. लोजपा( पारस) के साथ राजद किस तरह की तालमेल करता है या फिर लोजपा पारस का मर्जन राजद में हो जाता है, इस तरह की बातें भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा है. राजद अपने कोटें से झामुमो को कितनी सीट देता है, वह राजद के उपर निर्भर करता है. कुल मिलाकर देखा जाए तो सीट शेयरिंग का मामला अब भी फंसा हुआ है. (नीचे भी पढ़े)
माना जा रहा है कि भाजपा व जदयू में सीट शेयरिंग पर आपसी सहमति बन गयी है. लेकिन कुशवाहा व मांझी की नाराजगी साफ झलक रही है. पहले तो चिराग भी नाराज चल रहे थे लेकिन उन्हें मना लिया गया है. इसी बीच जीतनराम व उपेंद्र कुशवाहा को गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली बुलाया है. अमित शाह दोनों नेताओं से अलग अलग मुलाकात कर सकते है. सीट को लेकर बनी नाराजगी को दूर करना व एनडीए की एकजुटता का संदेश देना है. राजनीति गलियारों में चर्चा है कि जदयू करीब 102, भाजपा 101 व चिराग को 26 सीट देने पर सहमति बनी है. शेष सीट पर कुशवाहा व मांझी के बीच बंटवारा कर दिया जाएगा. इसी तरह महागठबंधन में भी राजद अपने पास 130 सीट, कांग्रेस 55-60 सीट, सहनी की वीआईपी को 15-20, माले 20, माकपा व भाकपा के बीच 15 सीट का अनुमान है. कुछ सीटें घट बढ़ भी सकती है. लेकिन इसी आंकडे के पास रहने का अनुमान है. विदित हो कि बिहार में इस बार दो चरणों में चुनाव होना है। 6 और 11 नवंबर को वोट डाले जाएंगे वहीं 14 नवंबर को परिणाम की घोषणा होगी.



