जमशेदपुर : सरायकेला खरसावां जिले के गम्हरिया स्थित मेटाल्सा कंपनी में चला आ रहा आंदोलन समाप्त हो गया है. इसको लेकर कई मुद्दों पर फैसला लिया गया है. मेटालसा वर्कर्स यूनियन की शिकायत पर मुख्य कारखाना निरीक्षक, झारखंड ने सरायकेला कारखाना निरीक्षक को पत्र भेजकर जांच के आदेश दिए हैं. इसमें निर्देश दिया गया है कि सभी नियमों का पालन करते हुए एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए. सफाई कर्मचारी एवं ठेका मजदूरो के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में, स्थायी कर्मचारियों के साथ एक ही कैंटीन में भोजन करने के नियम को लागू किया गया. इस फैसले पर यूनियन अध्यक्ष राजीव पांडेय का कहना है कि यह केवल एक नियम नहीं, बल्कि मजदूरों की गरिमा की जीत है. इसके अतिरिक्त, यूनियन ने बी शिफ्ट की बहाली तथा कोरोना काल में दी गई आर्थिक सहायता राशि की वसूली पर प्रतिबंध लगाने की मांग को भी सफलतापूर्वक लागू करवाया. (नीचे भी पढ़ें)
मेटालसा वर्कर्स यूनियन और कंपनी प्रबंधन के बीच सफल वार्ता के बाद, 90% मांगों को तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है. यूनियन अध्यक्ष राजीव पांडेय के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने सर्वसम्मति से आंदोलन को 24 मार्च तक के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया. कंपनी प्रबंधन पर लगे आरोपों की जांच के लिए वरीय प्रबंधन द्वारा एक विशेष समिति गठित की गई है. यह समिति 24 मार्च को मेक्सिको से आएगी और शेष मांगों पर अंतिम निर्णय लेगी. वार्ता के दौरान कई मांगों को पूरा किया गया, जिसमें स्थायी कर्मचारियों के लिए ‘बैंक आवर’ प्रणाली को तत्काल समाप्त किया गया, बी शिफ्ट को बहाल किया गया, ठेका श्रमिकों को मासिक बोनस के बजाय वार्षिक भुगतान दिया जाएगा, हाउसकीपिंग स्टाफ को स्थायी मजदूरों की तरह कैंटीन की सुविधा दी जाएगी, अस्थायी एवं ठेका मजदूरों को ओवरटाइम (ओटी) का भुगतान दोगुना किया जाएगा. यह आंदोलन सिर्फ वेतन वृद्धि के लिए नहीं था, बल्कि पिछले 15 वर्षों से चले आ रहे शोषण के खिलाफ एक न्यायिक लड़ाई थी. मजदूरों को बैंक आवर, ओवरटाइम और अन्य सुविधाओं से वंचित रखा गया था. जब मजदूरों ने यूनियन का गठन किया, तो प्रबंधन ने इसे कमजोर करने के लिए जबरन हस्ताक्षर करवाने की कोशिश की. (नीचे भी पढ़ें)
इसके विरोध में 3 मार्च से मजदूरों ने हड़ताल की, जिसके बाद प्रबंधन को झुकना पड़ा और 90% मांगें माननी पड़ीं. यूनियन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 24 मार्च तक सभी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। इसके लिए पूरी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की होगी. यूनियन अध्यक्ष राजीव पांडेय ने कहा है कि हम मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा उद्देश्य कंपनी को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि मजदूरों को उनका हक दिलाना है. हमने प्रबंधन को सोचने का समय दिया है, लेकिन अगर 24 मार्च तक समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन और व्यापक होगा. संघर्ष ही जीत की नींव रखता है. मजदूरों की एकता ने यह साबित कर दिया कि जब हम एकजुट होते हैं, तो हमारी आवाज दबाई नहीं जा सकती। संगठित रहिए, संघर्ष जारी रखिए.



