जमशेदपुर : हमारे द्वारा बनाई जाने वाली बिजली असल में बहकर कहाँ जाती है? ज़्यादातर लोग मानते हैं कि, बिजली का यह सफर तब खत्म हो जाता है जब कोई लाइट जलती है, कोई मशीन चलना शुरू होती है, या किसी घर को बिजली मिलती है. लेकिन टाटा पावर के लिए, यह सफर इससे बहुत आगे तक जाता है. यह सफर आगे बढ़कर उन कक्षाओं तक जाता है जहां बच्चे नए अवसरों और संभावनाओं की खोज करते हैं. यह सफर उन रोज़गारों तक जाता है जो परिवारों को एक बेहतर भविष्य बनाने में मदद करते हैं. यह सफर उन समाजों तक जाता है जो पहले से कहीं अधिक समावेशी, मज़बूत और आत्मनिर्भर बनते हैं और यह सफर उन सामूहिक प्रयासों तक जाता है जो आने वाले कल को पर्यावरण के अनुकूल और सुरक्षित बनाते हैं. टाटा पावर को काम करते हुए 100 साल से भी ज़्यादा हो चुके हैं. इस दौरान जैसे-जैसे उनका बिज़नेस नए-नए इलाक़ों में बढ़ा, वैसे-वैसे उन लोगों की ज़िंदगी बदलने की कहानियां भी सामने आने लगीं, जिन्हें टाटा पावर रोज़ बिजली पहुंचाता है. ‘विद्युत धारा’ की शुरूआत इन सभी कहानियों को एक साथ मिलाकर पेश करने के लिए की गई है. यह पहल टाटा पावर के उस दृष्टिकोण को दिखाती है, जिसका मकसद पर्यावरण के अनुकूल, सस्ती और नए जमाने की बिजली सुविधाओं के जरिए 100 करोड़ लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है. (नीचे भी पढ़ें)
साथ ही, यह कंपनी के उस वादे को भी पूरा करती है, जिसमें वे सिर्फ घरों और उद्योगों को ही बिजली नहीं दे रहे हैं, बल्कि हर जीवन की अनगिनत उम्मीदों और सपनों को हर घंटे, हर दिन, जिंदगी भर के लिए आगे बढ़ा रहे हैं. ‘विद्युत धारा’ की शुरूआत इस सोच के साथ की गई है कि समाज का भला करना बिज़नेस से अलग नहीं है बल्कि उसी का एक हिस्सा है. यही सोच कंपनी के काम करने के हर तरीके में दिखाई देती है. यह पहल दिखाती है कि बिजली सिर्फ घरों को रोशन नहीं करती, बल्कि उससे भी बढ़कर समाज के लिए कई मायनों में फायदेमंद साबित होती है, जैसे बच्चों की पढ़ाई, लोगों के रोज़गार, समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने, नए बिज़नेस शुरू करने और पर्यावरण की सुरक्षा के ज़रिए. ‘विद्युत धारा’ के ज़रिए, टाटा पावर एक बार फिर अपने इस वादे को दोहराती है कि वह न सिर्फ घरों, फैक्ट्रियों और बिजनेस को रोशनी देगी, बल्कि लोगों के सपनों, नए अवसरों और एक सुरक्षित भविष्य को भी आगे बढ़ाएगी. इसके साथ ही कंपनी अपने संस्थापक जमशेदजी टाटा के उस विश्वास को आगे बढ़ा रही है, जिसके तहत यह व्यवसाय अपनी संपत्ति को उस समाज की अमानत समझता है जिसकी वह सेवा करता है. यह फिल्म कंपनी की कहानियों के ज़रिए समाज को प्रेरित करने के सफर में एक नया अध्याय है, जो यह जीवंत रूप से दिखाती है कि कैसे बिजली पूरे भारत में लोगों की ज़िंदगी और समाज को बदलने में एक बड़ी भूमिका निभा रही है. ‘विद्युत धारा’ यह दिखाती है कि कैसे बिजली सिर्फ ग्रिड तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे भी आगे बढ़कर लोगों के सपनों को उड़ान देती है. (नीचे भी पढ़ें)
इस पहल को एक ओरिजिनल फिल्म और टाइटल ट्रैक के ज़रिए पेश किया गया है. यह गाना और फिल्म लोगों के जीवन में आगे बढ़ने के अवसरों, उनके संघर्षों, सबको साथ लेकर चलने की सोच और पर्यावरण के अनुकूल हो रही तरक्की की कहानियों को बेहद खूबसूरती से एक साथ पिरोते हैं. ‘धारा’ इस फिल्म की मुख्य किरदार है. उसका सफर कक्षाओं, वर्कशॉप्स, खेतों और अलग-अलग समाजों से होकर गुज़रता है. यह सफर सचमुच यह दिखाता है कि ग्रिड से निकलने के बाद बिजली असल में कहां जाती है. जैसे-जैसे वह एक कहानी से दूसरी कहानी में आगे बढ़ती है, उसका यह सफर यह देखने का ज़रिया बन जाता है कि बिजली किस तरह लोगों की जिंदगी बदल रही है, जैसे लोगों को हुनरमंद बनाकर नए अवसर देना, उनके छोटे बिज़नेस को आत्मनिर्भरता में बदलना, समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ने की जगह देना और एक पूरी पीढ़ी को उस धरती की रक्षा करने के लिए प्रेरित करना जो उन्हें आने वाले समय में विरासत में मिलने वाली है. टाटा पावर की विरासत माने जाने वाले हाइड्रो पावर केंद्रों के खूबसूरत इलाकों और सौर, पवन व जल ऊर्जा से संवर रहे आधुनिक भविष्य के बैकग्राउंड पर बनी है. यह कंपनी की सबसे बड़ी सामाजिक पहलों से जुड़ी कहानियों को बेहद खूबसूरती से एक साथ पिरोती है. (नीचे भी पढ़ें)
टाटा पावर स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट: यह युवाओं को बिजली के क्षेत्र में काम करने के कौशल और पर्यावरण के अनुकूल नौकरियों के लिए हुनर सिखाता है. यह छोटे समूहों में लोगों की क्षमता बढ़ाने और उन्हें नया काम शुरू करने में मदद करने की पहल है, जिससे परिवारों को कमाई के पक्के साधन मिलते हैं. यह एक अनोखी कोशिश है जो दिमागी रूप से थोड़े अलग बच्चों या लोगों के प्रति समाज को जागरूक करने, उन्हें अपनाने और मज़बूत बनाने पर काम करती है. यह बिजली और पर्यावरण बचाने की सीख देने वाला एक पुराना कार्यक्रम है, जो बच्चों को प्रकृति की रक्षा करने और मौसम के बदलावों से लड़ने के लिए तैयार करता है. ‘विद्युत धारा’ को एक शानदार और जीवंत अनुभव बनाने के लिए, टाटा पावर ने ‘स्वरात्मा’ बैंड के साथ हाथ मिलाया है. ‘स्वरात्मा’ आज के दौर का एक प्रसिद्ध लोक-रॉक बैंड है, जो कहानियों के साथ सामाजिक जागरूकता को जोड़ने के लिए जाना जाता है. इस आपसी सहयोग से एक अनोखा और ओरिजिनल गाना तैयार हुआ है, जो इस फिल्म की मुख्य कहानी की कड़ी है. यह गाना और फिल्म दर्शकों को उम्मीद, संघर्ष और ज़िंदगी बदलने की खूबसूरत कहानियों के सफर पर ले जाते हैं. सुरक्षित और स्थायी तरक्की के प्रति टाटा पावर का यह संकल्प सीधे उसके स्वच्छ ऊर्जा रोडमैप से जुड़ा है. कंपनी ने साल 2030 तक अपने कुल पावर पोर्टफोलियो में पर्यावरण के अनुकूल बिजली की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 70 फीसदी करने का बड़ा संकल्प लिया है. यह एक ऐसा लक्ष्य है जो स्थायी तरक्की की बातों को सिर्फ कागज़ों या बयानों तक सीमित नहीं रखता, बल्कि कंपनी को इसके प्रति पूरी तरह जवाबदेह बनाता है. ‘विद्युत धारा’ इसी बड़े बदलाव का मानवीय चेहरा है. यह हमें याद दिलाती है कि स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ना और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना, असल में दो अलग-अलग रास्ते नहीं बल्कि एक ही सफर के दो पहलू हैं. ‘विद्युत धारा’ टाटा पावर के इस विश्वास को दर्शाती है कि सच्ची और स्थायी तरक्की तभी होती है, जब बिज़नेस का उद्देश्य और समाज की उम्मीदें दोनों एक साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं.







