जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित श्री श्री सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन गुरूवार को व्यासपीठ से भागवत भ्रमर आचार्य मयंक जी महाराज ने ध्रुव चरित्र, पुरन्जन उपाख्यान, अजामिल चरित्र एवं नरसिंह अवतार की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि अक्सर परेशानियां ही हमें भगवान की कृपा प्राप्त करने में मदद करती हैं. भगवान विष्णु की भक्ति से सब कुछ संभव है. कुछ भी ऐसी चीज नहीं है, जो भगवान नहीं दे सकते. ‘भगवान विष्णु सब कुछ दे सकते हैं. (नीचे भी पढ़े)

ध्रुव जी ने छह महीने की कठिन तपस्या कर भगवान् विष्णु का साक्षात्कार किया. भगवान् विष्णु ध्रुव जी की तपस्या से खुश होकर उनके सपने प्रकट हो गए और उन्हें आपकी गोद में बिठाया. श्री श्याम भटली परिवार जमशेदपुर एवं भयली महिला मंडल सोनारी द्धारा संयुक्त रूप आयोजित भागवत कथा में व्यास पीठ से कथा वाचक ने आगे बताया कि अजामिल चरित्र और नरसिंह अवतार, दोनों ही हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण कथाएं हैं जो भगवान की महिमा और भक्तों के प्रति उनकी असीम कृपा को दर्शाती हैं. अजामिल की कथा बताती है कि कैसे भगवान का नाम लेने मात्र से, यहां तक कि अनजाने में भी, व्यक्ति पापों से मुक्त हो सकता है. वहीं, नरसिंह अवतार की कथा भगवान विष्णु के उग्र रूप को प्रदर्शित करती है, जो भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए और दुष्ट हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए प्रकट हुए थे. कथावाचक ने आगे कहा कि पुरंजन उपाख्यान, श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित एक रूपकात्मक कथा है, जो जीव (पुरंजन) और परमात्मा (अविज्ञात) के बीच के संबंध को दर्शाती है. (नीचे भी पढ़े)

यह कथा बताती है कि कैसे जीव सांसारिक सुखों में फंसकर अपने वास्तविक स्वरूप (परमात्मा) को भूल जाता है, और फिर गुरु (अविज्ञात) की कृपा से उसे अपने स्वरूप का ज्ञान होता है और वह परमात्मा में लीन हो जाता है. महाराज जी चौथे दिन शुक्रवार को गजेन्द्र मोक्ष, वामन अवतार, राम अवतार, कृष्ण जन्म एवं नंदोत्सव कथा की महिमा का प्रसंग सुनायेंगे. तीसरे दिन गुरूवार को मुख्य यजमान के रूप में भावना मेहता, विपिन कुमार रूस्तोगी, कैलाश शर्मा, दीपक भालोटिया, संजय लोधा, ओमप्रकाश अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल, रामअवतार सिंघानिया, आनन्द अग्रवाल, ओम अग्रवाल, विवेक चौधरी सहित कई गणमान्य उपस्थित थे. इसका आयोजन श्री श्याम भटली परिवार जमशेदपुर एवं भयली महिला मंडल सोनारी द्धारा संयुक्त रूप से किया जा रहा हैं. कथा में बड़ी संख्या में पधारकर कथा प्रेमियों द्वारा निष्ठा एवं भाव पूर्वक प्रभु कथा का रसपान किया गया.



