रामगोपाल जेना/चाईबासा : अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ की पश्चिम सिंहभूम जिला इकाई ने उपायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री एवं राज्य के मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंप कर 20 से 30 साल की सेवा दे चुके राज्य के करीब 30 हजार शिक्षकों सहित लाखों शिक्षकों की समस्या के समाधान की पहल करने का आग्रह किया है. (नीचे भी पढ़ें)

बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही इससे संबंधित एक याचिका के संबंध में पारित आदेश के कारण राज्य के 20 से 30 वर्षों की सेवा दे चुके करीब तीस हजार शिक्षकों सहित देश के लाखों शिक्षकों की सेवा समाप्त होने एवं प्रोन्नति से वंचित किये जाने की समस्या उत्पन्न हो गई है. अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के महासचिव असीम कुमार सिंह ने बताया कि संसद द्वारा अधिनियमित आरटीई अधिनियम 2009 के आलोक में एनसीटीई की अधिसूचना (संख्या 24/2017) के पारा-4 एवं भारत सरकार के अन्य आदेशों के प्रतिकुल विगत 1 सितंबर को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सिविल अपील (संख्या 1385/2025) में पारित प्रतिकूल आदेश के कारण झारखण्ड सहित देश के लाखों शिक्षकों की प्रोन्नति और सेवा खतरे में आ गई है. इस निमित्त माननीय प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को तथ्यों से अवगत कराते हुए उनसे इस संबंध में विशेष कदम उठाने की अपील की गई है. श्री सिंह ने बताया कि पारित न्यायादेश के अनुसार निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम 2009 के तहत शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित न्यूनतम अर्हता निर्धारण, 23.8.2010 से पूर्व के नियुक्त सेवारत शिक्षकों के लिए भी टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है. उक्त आदेश के आलोक में टीईटी उत्तीर्ण नहीं करने की स्थिति में शिक्षकों को न सिर्फ प्रोन्नति से वंचित रहना पड़ेगा, बल्कि उन्हें सेवामुक्त भी कर दिया जाएगा जो न्यायसंगत नहीं है. उक्त न्यायादेश से असहमत होने के तथ्य में संघ ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि एनसीटीई द्वारा 23.8.2010 को जारी अधिसूचना में टीईटी उत्तीर्णता को रखा गया है, परंतु इसी अधिसूचना के पारा-4 में पूर्व के नियुक्त सेवारत शिक्षकों को इससे मुक्त रखा गया है, जिसे न्यायादेश में ओवरलुक कर दिया गया है. इसके अलावा निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम (संशोधित) 24/2017 में भी 23.8.2017 से पूर्व के नियुक्त शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्णता की अधिसूचना से ही मुक्त किया जा चुका है. जिला महासचिव ने कहा कि एनसीटीई ने सर्वोच्च न्यायालय में समर्पित अपने शपथ पत्र में भी उक्त बिंदुओं को स्पष्ट किया है. (नीचे भी पढ़ें)
मुख्यमंत्री के नाम प्रेषित ज्ञापन में संगठन ने झारखण्ड के लगभग तीस हजार शिक्षकों की सेवा संरक्षित रखने तथा उनकी वरीयता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए विधायिका की प्रदत व्यवस्था के प्रतिकूल पारित उक्त न्यायादेश के विरुद्ध सरकार के स्तर से पुनर्विचार याचिका दायर किये जाने का अनुरोध किया है. साथ ही, प्रधानमंत्री से देश के लाखों शिक्षकों की सेवा संरक्षित करने हेतु यथोचित समीक्षा करने के निमित्त आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है. समाहरणालय स्थित उपायुक्त कार्यालय में ज्ञापन सौंपने पहुंचने वालों में महासचिव के अलावा अखिल झारखण्ड प्राथमिक शिक्षक संघ, कोल्हान प्रमण्डल के अध्यक्ष अजय साहू, जिला अध्यक्ष उपेंद्र सिंह के अलावा काफी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल थे.



