जमशेदपुर : जसकनडीह ग्रामसभा के तत्वावधान में आदिवासी हो समाज युवा महासभा की ओर से ओत गुरु लाको बोदरा की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया. पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने विधि विधान के साथ समारोह का उद्घाटन किया. आदिवासी हो समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरा बिरुलू ने कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन किया. (नीचे भी पढ़ें)

ओत गुरु लाको बोदरा को हो भाषा की वारंगक्षिति लिपि के जनक के रूप में जाना जाता है, और उनका योगदान आदिवासी हो समाज के लिए अतुलनीय है. वारंगक्षिति लिपि ने हो भाषा को एक नई दिशा दी और इसे संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इस अवसर पर श्री सोरेन ने कहा कि भाषा और संस्कृति हमारी पहचान हैं और इन्हें संरक्षित और प्रोत्साहित करना हम सबकी जिम्मेदारी है. उन्होंने आगे कहा कि ओत गुरु लाको बोदरा का योगदान हमें हमेशा प्रेरित करता रहेगा और हमें उनकी विरासत को सहेजने के लिए काम करना चाहिए. हो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करा के रहेंगे, इस वर्ष भी दोलाबु दिल्ली 5.0 जाने के लिए हर संभव मदद करेंगे. कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और समाज के सदस्यों ने ओत गुरु लाको बोदरा जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. (नीचे भी पढ़ें)

इस अवसर पर हो भाषा के विकास और प्रसार पर भी चर्चा हुई और इसे जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया. कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला पार्षद कुसुम पुर्ती, मुखिया संजू भूमिज, रामचन्द्र तियू, हातु मुंडा, मुखिया सुमन सिरका, सुखलाल हेम्ब्रम, नीरज सिंह सरदार, विशवजीत भगत आदि भी समारोह में उपस्थित रहे. (नीचे भी पढ़ें)

कार्यक्रम के माध्यम से ओत गुरु लाको बोदरा के योगदान को सम्मानित करने और हो भाषा को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. हमें उम्मीद है कि यह पहल समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी और हो भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाएगी. राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरा बिरुली, गंगाराम बानरा, शिव हांसदा, चैतन्य पुर्ती, मोचीराम मार्डी, बेतो कुंकल, सकरू कुंकल, हकाल मुर्मू, मोना देवगम, मोतीलाल सामड, साधु सामड, रतन सामड, मोसो सोय, कन्हाई हेम्ब्रम, सोनाराम आल्डा, संदीप सामड, अजय सामड, राजू सामड आदि उपस्थित रहे.



