जमशेदपुर : जुगसलाई स्थित श्री राजस्थान शिवमंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन ब्यासपीठ से बोलते हुए आचार्य मोहित दुबे ने भगवान् श्री कृष्ण के महारास की सारगर्भित व्याख्या करते हुए रास की महिमा, महारास में भाग लेनेवाली गोपियों के बारे में बताया एवं गोपी कौन है, गोपी किसे कहते हैं, इस संबंध में विस्तार से बताया. उन्होंने श्री कृष्ण के वृंदावन के निधि वन में किये जानेवाले और वृंदावन के नीधि वन में आज भी श्री कृष्ण ओर गोपियों के प्रति दिन ओर विशेष रूप से शरद पूर्णिमा की रात में होने वाले महारास के बारे में बताया. (नीचे भी पढ़ें)

कथा प्रसंग को आगे बढाते हुए उन्होंने बताया कि कैसे मामा कंस के द्वारा श्री कृष्ण एवं बलराम को मारने के उद्देश्य से अक्रूर जी के माध्यम से गोकुल से मथुरा बुलाया गया और फिर कैसे श्री कृष्ण और बलराम ने मिलकर अपने मामा कंस के जीवन का अंत किया. उन्होंने आज के कथा प्रसंग में भगवान् श्री कृष्ण ओर रुक्मिणी के विवाह की कथा का भी वर्णन किया. प्रेक्षागृह में महारास के प्रसंग के समय अत्यंत ही मनोहारी छटा बिखर गई जब भावपूर्ण मयूर नृत्य का प्रदर्शन हुआ. भक्त गण मयूर नृत्य देख भावविभोर हो नाचने लगे. (नीचे भी पढ़ें)

भगवान् श्री कृष्ण एवं रुक्मिणी के विवाह के पश्चात की झांकी की दिव्य प्रस्तुति भी की गई. भगवान् श्री कृष्ण और रुक्मिणी जी के विवाह के उपलक्ष्य में बधाइयां दी गईं एवं मिठाइयां भी बंटीं. आज कथा को सफल बनाने में शिवमंदिर के अध्यक्ष छीतरमल धूत, महासचिव अरुण अग्रवाल, कोषाध्यक्ष दीपक अग्रवाल रामुका के साथ सांवर लाल शर्मा, पवन सिंगोदिया, पवन काबरा, विश्वनाथ शर्मा, विजय अजय सरायवाला, सुशील सर्वा, संजय गुप्ता, राजेश आदि ने अहम भूमिका निभाई. आज की कथा में कृष्ण कुमार अग्रवाल, दीपचंद अग्रवाल, विकास शर्मा, विमल मेंगोतिया, गिरधारी लाल शर्मा, मनोज केडिया, नथमल शर्मा आदि गणमान्य श्रद्धालु उपस्थित रहे.



