जमशेदपुर : जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित डीडी बार में कातिलाना हमले में हिमांशु की मौत हो गयी थी जबकि इस घटना में हिमांशु का साथी प्रत्युष कुमार भी गंभीर रुप से घायल हो गया था. वह अभी कोलकाता के एक निजी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है. प्रत्युष कुमार के बड़े पिताजी चंदन सिंह बिल्डर है. उन्होंने एक भावुक पोस्ट किया है और भाजपा नेताओं पर अनदेखी का आरोप लगाया है कि उनके भी भतीजे को गंभीर रुप से हमला किया गया, लेकिन पार्टी का कोई व्यक्ति ने आज तक उनको पूछा तक नहीं. उन्होंने लिखा है ”जिस पार्टी को परिवार समझा, आज उसी परिवार की खामोशी सबसे ज्यादा चुभ रही है…जब से भाजपा झारखंड की सदस्यता ग्रहण की, तभी से इस संगठन को अपना परिवार माना. (नीचे भी पढ़ें)

उन्होंने कहा है कि तन, मन और धन से पूरी निष्ठा के साथ पार्टी की सेवा की. चुनाव हो, संगठनात्मक कार्यक्रम हो या जनहित का कोई अभियान, हर जिम्मेदारी को अपना कर्तव्य समझकर निभाया। कार्यकर्ताओं और नेताओं के सुख-दुख में हमेशा सबसे आगे खड़ा रहा. लेकिन आज, जब मेरा अपना परिवार जीवन के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है, तब मैं खुद को बेहद अकेला और भीतर से टूटा हुआ महसूस कर रहा हूं. चंदन सिंह ने कहा कि उनका बेटा बेटा प्रत्यूष आनंद बिष्टुपुर स्थित डीडी पब में हुई घटना के दौरान और उसके बाद बाहर, यहां तक कि पीसीआर वैन के भीतर एवं बाहर भी पुलिस की मौजूदगी में हमलावरों के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया. आज वह अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है. पूरा परिवार गहरे सदमे में है. बेहतर इलाज के लिए हम शहर से बाहर भटक रहे हैं. हर पल भगवान से उसकी सलामती और जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं. ऐसी विकट परिस्थिति में मुझे उम्मीद थी कि जिस राजनीतिक परिवार के लिए मैंने अपना सब कुछ समर्पित कर दिया, उसके वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी कम-से-कम एक बार हमारे परिवार का हाल-चाल पूछेंगे. श्री सिंह ने कहा कि एक फोन कॉल, एक संदेश या सांत्वना के दो शब्द भी इस कठिन समय में बहुत बड़ा संबल बन सकते थे. लेकिन अत्यंत पीड़ा के साथ कहना पड़ रहा है कि भाजपा के किसी भी बड़े नेता या पदाधिकारी ने हमारे परिवार की सुध लेना भी जरूरी नहीं समझा. चंदन सिंह ने लिखा है कि आज मन बार-बार एक ही सवाल पूछ रहा है, क्या वर्षों की निष्ठा, समर्पण और संघर्ष की यही कीमत होती है? (नीचे भी पढ़ें)
क्या कार्यकर्ता सिर्फ तब तक अपना होता है, जब तक वह पार्टी के लिए काम करता रहे? क्या उसके जीवन के सबसे कठिन समय में उसका अपना संगठन भी उसके साथ खड़ा नहीं होता? चंदन सिंह ने यह भी लिखा है कि यह पोस्ट किसी राजनीतिक लाभ, सहानुभूति या विवाद के लिए नहीं है. यह एक टूटे हुए बड़े पिता के दिल की आवाज है, जो अपने बेटे को जिंदगी के लिए लड़ते हुए देख रहा है और साथ ही अपने ही माने जाने वाले राजनीतिक परिवार की खामोशी से भीतर तक आहत है. उन्होंने कहा कि मेरी पहली और आखिरी प्राथमिकता सिर्फ प्रत्यूष आनंद का जीवन बचाना है. हाथ जोड़कर ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उसे जल्द स्वस्थ करें और हमारे परिवार को इस कठिन परीक्षा से लड़ने की शक्ति दें. संकट की घड़ी में ही अपनों की असली पहचान होती है. आज यह सच मैंने बहुत करीब से महसूस किया है.
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