जमशेदपुर : झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन (जेएचआरसी) ने पश्चिम बंगाल की तर्ज पर झारखंड के निजी अस्पतालों में आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए 20 प्रतिशत निःशुल्क ओपीडी उपचार एवं 10 प्रतिशत बेड आरक्षित करने की मांग को लेकर उपायुक्त (डीसी) के माध्यम से राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा. संगठन के प्रमुख मनोज मिश्रा ने कहा कि झारखंड में बड़ी संख्या में गरीब एवं निम्न आय वर्ग के लोग आर्थिक तंगी के कारण निजी अस्पतालों में इलाज कराने से वंचित रह जाते हैं. कई मामलों में अत्यधिक इलाज का खर्च, उपचार की लागत की पूर्व जानकारी का अभाव तथा आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इलाज देने से इनकार जैसी गंभीर शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने बताया कि झारखंड में क्लिनिकल प्रतिष्ठान (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम 2010 लागू है, जिसके तहत राज्य सरकार मरीजों के हित में आवश्यक नियम एवं अतिरिक्त प्रावधान लागू कर सकती है. मनोज मिश्रा ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने इसी अधिनियम के अंतर्गत संशोधन कर ऐसे प्रभावी प्रावधान लागू किए हैं, जिनके अनुसार सरकार से भूमि, कर में छूट, वित्तीय सहायता अथवा अन्य सरकारी सुविधाएं प्राप्त करने वाले निजी अस्पतालों के लिए अपने ओपीडी के कम-से-कम 20 प्रतिशत मरीजों का निःशुल्क इलाज तथा आईपीडी के कम-से-कम 10 प्रतिशत बेड आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए आरक्षित करना अनिवार्य किया गया है. जेएचआरसी ने मांग की कि जनहित को देखते हुए झारखंड सरकार भी पश्चिम बंगाल की तर्ज पर यही व्यवस्था तत्काल लागू करे, ताकि गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों को सम्मानपूर्वक और समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सके तथा निजी अस्पतालों की सामाजिक जवाबदेही भी सुनिश्चित हो. ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन प्रमुख मनोज मिश्रा के साथ अभिजीत चंदा, सलावत महतो, रेणु सिंह, किशोर वर्मा, संतोष कुमार, एसके बासु, आरसी प्रधान, जगन्नाथ महंती एवं डीएन शर्मा उपस्थित थे.




