जमशेदपुर : जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग की ओर से शनिवार, 08 अगस्त को बिष्टुपुर परिसर स्थित स्मार्ट सेमिनार हॉल में मुंशी प्रेमचंद की जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई. कार्यक्रम का उद्देश्य प्रेमचंद के साहित्य, उनके सामाजिक सरोकारों तथा समकालीन संदर्भों में उनकी प्रासंगिकता को रेखांकित करना था. कुलपति डॉ इला कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित जयंती समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ. कार्यक्रम में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ नूपुर अन्विता मिंज ने आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रेमचंद के साहित्य की व्यापकता और सामाजिक सरोकारों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी प्रासंगिक बना हुआ है. समारोह में छात्रा वर्षापति ने प्रेमचंद के अति आकर्षक नाटकीय परिचय प्रस्तुत किया, जिसके माध्यम से उनके जीवन, व्यक्तित्व और साहित्यिक योगदान को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा. इसके बाद छात्रा खुशी कुमारी ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व पर स्वरचित कविता का पाठ किया. (नीचे भी पढ़ें)

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण “पात्र-परिचय के माध्यम से प्रेमचंद की प्रासंगिकता” विषय पर प्रस्तुत नाट्यात्मक प्रस्तुति रही. हिन्दी विभाग की छात्राओं, एकता कुमारी, प्रिया कुमारी एवं जैस्मिन कुमारी ने प्रेमचंद की विभिन्न कालजयी रचनाओं के पात्रों के माध्यम से उनके साहित्य में निहित सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदना और समकालीन प्रासंगिकता को प्रस्तुत किया. इस प्रस्तुति की सूत्रधार हिन्दी विभाग की शोधार्थी आयशा रहीं. प्रस्तुति के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि प्रेमचंद के पात्र केवल साहित्य के पृष्ठों तक सीमित नहीं, बल्कि आज भी हमारे सामाजिक जीवन और मानवीय प्रश्नों के बीच जीवंत दिखाई देते हैं. हिन्दी विभाग की पूर्व अध्यक्ष डॉ पुष्पा कुमारी ने प्रेमचंद के सामाजिक व साहित्यिक महत्त्व को उनके कहे वाक्यों के माध्यम से दर्शाया. (नीचे भी पढ़ें)
समारोह के मुख्य वक्ता एवं मानविकी संकायाध्यक्ष डॉ सुधीर कुमार साहु ने प्रेमचंद के साहित्यिक अवदान पर अपने विचार व्यक्त किए. उन्होंने प्रेमचंद को भारतीय समाज के सजग और संवेदनशील साहित्यकार के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य समाज के वंचित और शोषित वर्गों की आवाज़ को अभिव्यक्ति देता है. उनके साहित्य में सामाजिक यथार्थ के साथ-साथ परिवर्तन की आकांक्षा भी दिखाई देती है. उन्होंने छात्राओं की रचनात्मक एवं साहित्यिक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए साहित्य के अध्ययन को समाज और जीवन से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया. हिन्दी विभाग द्वारा आयोजित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं तथा प्रतिभागियों को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया. निबंध प्रतियोगिता की निर्णायक मंडली में दर्शनशास्त्र विभाग की अध्यक्ष डॉ अमृता कुमारी एवं एनएसएस समन्वयक डॉ ग्लोरिया पुर्ती मौजूद थीं. विजेताओं के नाम की घोषणा डॉ अमृता कुमारी ने की. इस अवसर पर हिन्दी विभाग की ओर से 25 छात्राओं को उनकी प्रतिभा, सहभागिता एवं रचनात्मक योगदान के लिए सम्मानित किया गया. डॉ सुधीर कुमार साहू ने छात्राओं के बीच प्रमाण पत्र वितरित किये.
कार्यक्रम के अंत में हिन्दी विभाग की छात्रा वर्षापति ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले विश्वविद्यालय प्रशासन, अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों, छात्राओं एवं आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों का आभार जताया. कार्यक्रम में सिंधु शर्मा, उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ रिजवाना परवीन, डॉ पुष्पलता, डॉ रत्ना मित्रा, डॉ जया घोष, डॉ प्रणिता कुमारी, डॉ श्यामला, डॉ सुनीता कुमारी, प्रीति आदि सहित अन्य शिक्षक एवं छात्राएं भी उपस्थित रहीं.




