जमशेदपुर : पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्तफा की विलादत-ए-बासआदत के मुबारक मौके पर तंजीम अहले सुन्नत वल जमात के बैनर तले जमशेदपुर में धार्मिक जोश, अकीदत, एहतराम और मोहब्बत-ए-रसूल के जज्बे के साथ भव्य जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया. शहर के विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में आशिकाने रसूल जुलूस में शामिल हुए। दरूद व सलाम, नातख्वानी और जिक्र-ए-रसूल से पूरा माहौल पुरनूर और खुशगवार हो गया. जुलूस-ए-मोहम्मदी के दौरान विभिन्न स्थानों पर लोगों ने जुलूस का शानदार इस्तकबाल किया. पूरे रास्ते धार्मिक झंडे, खूबसूरत सजावट और जगह-जगह इस्तकबाल के इंतजाम देखने को मिले. नौजवानों, बुजुर्गों और बच्चों समेत समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने पूरे जोश और अकीदत के साथ जुलूस में शिरकत की. जुलूस के दौरान अमन, इत्तेहाद, भाईचारे और मोहब्बत का पैगाम भी दिया गया. (नीचे भी पढ़ें)

जमशेदपुर में जुलूस-ए-मोहम्मदी की एक शानदार रवायत रही है. तंजीम अहले सुन्नत वल जमात के बैनर तले तंजीम के मौजूदा कार्यकारी अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान तथा मरहूम तैयब खान और मरहूम शरफुद्दीन खान के साथ-साथ तंजीम में हालात सुन्नत वल जमात के उल्लामा-ए-कराम की संयुक्त कोशिशों से वर्ष 2008 में पहली बार जुलूस-ए-मोहम्मदी संयुक्त रूप से निकाला गया था. इससे पहले जुलूस-ए-मोहम्मदी अधिकतर मदरसा स्तर या गली-मोहल्ले तक ही सीमित रहता था और ईद मिलादुन्नबी का जश्न भी मोहल्ले की सतह तक ही मनाया जाता था. जुलूस भी मोहल्ले तक ही रह जाता था. इसके बाद उक्त नेताओं की कोशिशों और तंजीम अहले सुन्नत वल जमात के तमाम सदस्यों एवं उलमाए कराम के सहयोग से जुलूस-ए-मोहम्मदी को बड़े पैमाने पर धूमधाम से निकाले जाने की रवायत शुरू हुई. (नीचे भी पढ़ें)

प्रशासन से इजाजत लेने में काफी मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन सभी लोग लगातार कोशिश करते रहे. आखिरकार जिला प्रशासन ने जुलूस का रूट तय किया और वर्ष 2008 में बहुत ही शानदार तरीके से बड़े पैमाने पर जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया. उस दौर में शहर के विभिन्न इलाकों से आने वाले तमाम जुलूस पहले मानगो गांधी मैदान में जमा होते थे. मानगो गांधी मैदान से सभी जुलूस एक साथ साकची होते हुए धतकीडीह सेंटर मैदान पहुंचते थे. वहीं शहर के दूसरी तरफ के इलाकों, जैसे जुगसलाई, मखदूमपुर, कीताडीह, परसुडीह और हल्दीपोखर आदि से आने वाले जुलूस सीधे धतकीडीह सेंटर मैदान पहुंचते थे. यहां सभी जुलूस एक भव्य जलसे की शक्ल अख्तियार कर लेते थे. इसी तरह कई वर्षों तक जुलूस-ए-मोहम्मदी निकलता रहा और इसमें लाखों लोग नजर आते थे. करीब तीन से चार साल पहले जुलूस के रूट में कुछ बदलाव किए गए. मानगो इलाके के उलमा-ए-कराम ने फैसला लिया कि पहले साकची आम बागान मैदान में जुलूस को जमा किया जाए. मानगो और उसके आसपास के इलाकों के लोग साकची आम बागान मैदान में जमा होते और वहां सलातो-सलाम तथा दरूद व सलाम के बाद धतकीडीह की ओर रवाना होते थे. धीरे-धीरे इस रूट में भी बदलाव आते गए. अब लगभग सभी जुलूस बाकायदा साकची आम बागान मैदान में जमा होने लगे हैं, जहां एक भव्य जलसे का आयोजन किया जाता है. (नीचे भी पढ़ें)
इसके बाद जुलूस धतकीडीह भी पहुंचता है, लेकिन अब वहां पहुंचने में पहले की तुलना में कुछ देरी हो जाती है. शहर के दूसरे हिस्सों से आने वाला जुलूस पहले सीधे धतकीडीह पहुंचता था, लेकिन अब मानगो इलाके से आने वाला जुलूस साकची आम बागान में जमा होता है. वहीं जुगसलाई, मखदूमपुर और आसपास के इलाकों के लोग जुगसलाई फाटक होते हुए धतकीडीह पहुंचते हैं, जहां जश्न-ए-विलादत-ए-रसूल अकरम धूमधाम से मनाया जाता है. झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष और तंजीम अहले सुन्नत वल जमात के कार्यकारी अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने जश्न-ए-विलादत-ए-रसूल अकरम के मौके पर जमशेदपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों और जुलूस-ए-मोहम्मदी में शिरकत की. उन्होंने लोगों से मुलाकात कर ईद मिलादुन्नबी की मुबारकबाद पेश की और विभिन्न धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होकर अपनी अकीदत का इजहार किया. जश्न-ए-विलादत-ए-रसूल अकरम के मौके पर हिदायतुल्लाह खान सबसे पहले मानगो पहुंचे. मानगो पहुंचने के बाद वह जुलूस के साथ कुछ दूर तक चले और फिर वापस जुगसलाई ईदगाह मैदान पहुंचे। ईदगाह मैदान से निकले जुलूस में भी वह शामिल हुए. जुलूस जुगसलाई फाटक के पास लगाए गए स्टेज के करीब रुका, जहां सलातो-सलाम पढ़ा गया। इस मौके पर हिदायतुल्लाह खान ने भी नात शरीफ पढ़ी. उन्होंने पढ़ा छोटा मुंह और बड़ी बात होगी, क्या करें हम सना-ए-मुहम्मद, और जेरे अर्शे बरीं बसने वालों, अर्श है जेरे पाए मुहम्मद, इसके साथ ही उन्होंने पढ़ा: सर झुका लो अदब का मकाम आ गया, थाम लो दिल मुहम्मद का नाम आ गया. इसके बाद हिदायतुल्लाह खान साकची स्थित आम बागान मैदान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए. इसके बाद वह धतकीडीह में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत के लिए रवाना हुए. इस दौरान विभिन्न स्थानों पर लंगर का इंतजाम किया गया था. हिदायतुल्लाह खान विभिन्न जगहों पर रुके और लंगर वितरण में शामिल हुए. इसके बाद वह धतकीडीह पहुंचे. वहां उनके भतीजे फरासत खान एंड टीम की ओर से लंगर वितरण का इंतजाम किया गया था. उन्होंने इस कार्यक्रम में भी शिरकत की और लंगर वितरित किया. इसके बाद हिदायतुल्लाह खान धतकीडीह सेंटर मैदान पहुंचे, जहां शहर के विभिन्न इलाकों से आए जुलूस एक भव्य जलसे की शक्ल अख्तियार कर लेते हैं. वहां भी हिदायतुल्लाह खान ने नात शरीफ पढ़ी सुन ए दोनों आलम में काम आने वाले, हम आसी हैं बख्शा दे बख्शाने वाले, इसके बाद सलातो-सलाम पढ़ा गया और दुआ के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ. इसके बाद हिदायतुल्लाह खान आजादनगर स्थित आजाद हॉल पहुंचे, जहां ह्यूमन फाउंडेशन ट्रस्ट और राबिया इंस्टीच्यूशन ट्रस्ट की संयुक्त कोशिश से 12 रबीउल अव्वल के मौके पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया था. इस शिविर में राबिया इंस्टीच्यूशन के छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और रक्तदान किया. इस मौके पर हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि हजरत मोहम्मद मुस्तफा की विलादत-ए-बासआदत पूरी इंसानियत के लिए अल्लाह तआला की बड़ी नेमत और रहमत है. (नीचे भी पढ़ें)
आपने दुनिया को अमन, मोहब्बत, अद्ल, मुसावात, रवादारी और भाईचारे का पैगाम दिया. आपकी सीरत-ए-तैयबा हर इंसान के लिए बेहतरीन नमूना है. अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड हमेशा से विभिन्न मजहबों, भाषाओं और संस्कृतियों के बीच आपसी मेलजोल और सामाजिक हमआहंगी की सरजमीन रहा है. हमें चाहिए कि ईद मिलादुन्नबी के इस बाबरकत मौके पर नफरत, तअस्सुब और तफरीक को खत्म कर मोहब्बत, अमन, इत्तेहाद और भाईचारे को मजबूत बनाने का अहद करें. उन्होंने आम लोगों से अपील की कि जश्न-ए-विलादत-ए-रसूल अकरम के मौके पर धार्मिक जज्बात के साथ-साथ गरीबों, मिस्कीनों, यतीमों और जरूरतमंदों की मदद करें तथा समाज में अमन और इंसानियत की खिदमत के जज्बे को फरोग दें. जमशेदपुर में जुलूस-ए-मोहम्मदी के मौके पर शहर के विभिन्न इलाकों में अकीदत और मोहब्बत का खासा जोश देखने को मिला. विभिन्न तंजीमों और स्थानीय लोगों की ओर से जुलूस के प्रतिभागियों के इस्तकबाल के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे. पूरे कार्यक्रम के दौरान अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे, मोहब्बत और इत्तेहाद का माहौल नजर आया.







