चाईबासा: झारखंड के राजस्व एवं भूमि सुधार तथा परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ की अध्यक्षता में पश्चिम सिंहभूम जिले में हाथी-मानव संघर्ष, सड़क निर्माण, वनाधिकार और अंतरविभागीय समन्वय को लेकर बैठक हुई. इस बैठक में हाथियों के आवागमन, कॉरिडोर, प्रभावित लोगों को मुआवजा, ग्रामीणों की सुरक्षा तथा वन विभाग और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा हुई. बैठक में लंबित मुआवजा मामलों के शीघ्र निष्पादन और प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा एवं बचाव व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए. डीसी ने बताया कि हाथियों की गतिविधियों की निगरानी और ग्रामीणों को समय पर सतर्क करने के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया गया. सारंडा डीएफओ अभिरूप सिन्हा ने बताया कि हाटगम्हरिया समेत कुछ क्षेत्रों में हाथियों की मौजूदगी स्थायी है. बदलते आवागमन मार्ग, भोजन की उपलब्धता और फीडिंग पैटर्न के कारण हाथी पारंपरिक कॉरिडोर से हटकर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच सकते हैं. (नीचे भी पढे)
कुछ क्षेत्रों में ऑटोमेटेड सायरन तकनीक का पायलट स्तर पर उपयोग किया जा रहा है. हाथियों के लिए बांस सहित पसंदीदा फॉडर प्रजातियों के विकास पर भी कार्य किया जा रहा है. संघर्ष से निपटने के लिए अतिरिक्त क्यूआरटी को मंजूरी दिए जाने की जानकारी भी बैठक में दी गई. इसके अलावा आरईओ और आरसीडी की सड़कों के निर्माण में लंबित एनओसी तथा अंतर विभागीय समस्याओं के समाधान पर चर्चा हुई. सामुदायिक और व्यक्तिगत वनाधिकार के पात्र लाभुकों को समयबद्ध लाभ पहुंचाने के लिए लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन पर भी जोर दिया गया. मंत्री ने संबंधित विभागों को समन्वय के साथ समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.बैठक में उपायुक्त मनीष कुमार, सारंडा वन प्रमंडल पदाधिकारी अभिरूप सिन्हा, संबंधित विभागों के कार्यपालक अभियंता एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे.




