जमशेदपुर : जमशेदपुर के डिमना स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज के पीजी हॉस्टल के पीछे झाड़ियों में शनिवार शाम करीब चार बजे एक गोह (इंडियन मॉनिटर लीज़र्ड) दिखाई देने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी सी मच गई. विशालकाय छिपकलीनुमा जीव को देख कर आसपास के लोग सहम गए और उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई. सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और गोह को सुरक्षित पकड़कर अपने साथ ले गई. बताया जा रहा है कि उसे किसी सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा. (नीचे भी पढ़ें)
जानकारों के अनुसार गोह आमतौर पर मनुष्यों के लिए खतरनाक नहीं होती, लेकिन उसके बड़े आकार और आवाज के कारण लोग अक्सर भयभीत हो जाते हैं. इसे लेकर लोगों के बीच कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जंगली जीव की तरह गोह से भी दूरी बनाए रखनी चाहिए और उसे छेड़ने या पकड़ने का प्रयास नहीं करना चाहिए. भारत में पाई जाने वाली इस बड़ी छिपकली को बंगाल मॉनिटर भी कहा जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम वैरानस बेंगालेन्सिस है. गोह की लार में कुछ ऐसे तत्व हो सकते हैं, जिनसे काटने की स्थिति में दर्द या सूजन हो सकती है, हालांकि इसे सामान्यतः मनुष्यों के लिए घातक नहीं माना जाता. (नीचे भी पढ़ें)
गोह भारत के अधिकांश राज्यों के अलावा नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका में भी पाई जाती है. यह जंगलों, खेतों, झाड़ियों, चट्टानी इलाकों और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के बाहरी हिस्सों में देखी जा सकती है. एक वयस्क गोह की लंबाई करीब एक से डेढ़ मीटर तक हो सकती है. इसका शरीर मजबूत, पूंछ लंबी और जीभ सांप की तरह दो भागों में विभाजित होती है. इसका रंग आमतौर पर भूरा, धूसर या जैतूनी होता है, जिस पर छोटे-छोटे धब्बे दिखाई देते हैं. (नीचे भी पढ़ें)
यह मांसाहारी सरिसृप कीड़े-मकोड़े, चूहे, मेंढक, सांप, छोटे पक्षी, अंडे और अन्य छोटी छिपकलियों को खाती है। प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ खेतों में चूहों की संख्या नियंत्रित करने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. भारत में गोह को वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षण प्राप्त है. इसके शिकार, अवैध पकड़ने या व्यापार करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है. वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं गोह दिखाई दे तो उसे नुकसान न पहुंचाएं और तुरंत संबंधित वन विभाग या अधिकारियों को इसकी सूचना दें.




