जमशेदपुर : रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग और टाटा स्टील ने तीन साल की नई रिसर्च और इनोवेशन साझेदारी की घोषणा की. इस साझेदारी के तहत ब्रिटेन और भारत के उद्योग जगत और विश्वविद्यालय मिलकर सस्टेनेबल और रिसाइकिल की गई सामग्री के इस्तेमाल को बढ़ावा देंगे. इससे दोनों देशों में आर्थिक विकास को गति देने और रणनीतिक लाभ हासिल करने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही, भारत और ब्रिटेन के बीच नीतिगत मिशनों के जरिए जानकारी और अनुभव साझा किए जाएंगे. इनका फोकस संसाधनों के दोबारा इस्तेमाल और महत्वपूर्ण सामग्रियों व खनिजों की मजबूत सप्लाई चेन विकसित करने से जुड़े बाजार के रुझानों और अवसरों को समझने पर होगा. (नीचे भी पढ़ें)
ये पहल भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के साथ पहले किए गए सहयोग को आगे बढ़ाएंगी. ब्रिटेन और भारत, दोनों ही इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों को कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं. ऐसे में संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने में सर्कुलर मटेरियल्स से जुड़े नवाचार की अहम भूमिका होगी. इस साझेदारी के लिए यूके सरकार करीब 1.9 मिलियन ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग की राशि देगी, जबकि टाटा स्टील 1 मिलियन ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग का योगदान देगी. इससे कार्यक्रम को उद्योग जगत की विशेषज्ञता का लाभ भी मिलेगा. चुने गए प्रोजेक्ट्स को मिलने वाले अनुदान की राशि के कम से कम आधे के बराबर अतिरिक्त फंडिंग भी मिलेगी. फंडिंग का यह मॉडल उन टीमों को अपनी तकनीक को और बेहतर बनाने तथा प्रोजेक्ट का विस्तार करने में मदद करेगा, जो पहले से ही इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति करने के करीब हैं. साथ ही, उन्हें उद्योग जगत के सहयोग और नई विशेषज्ञता का लाभ भी मिलेगा. (नीचे भी पढ़ें)
टाटा स्टील के आरएंडडी एनएमबी व ग्रैफाइन के वाइस प्रेसिडेंट सुबोध पांडेय ने कहा कि टाटा स्टील का भविष्य सर्कुलर और सस्टेनेबल मटेरियल्स में नवाचार करने और उनके इस्तेमाल को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की हमारी क्षमता पर निर्भर करेगा इसलिए इस अहम साझेदारी का हिस्सा बनकर हमें खुशी है. यूके सरकार का सहयोग और रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के साथ यह साझेदारी न सिर्फ उपयोगी रिसर्च को वास्तविक औद्योगिक इस्तेमाल तक पहुंचाने का अवसर देती है, जिसका लाभ हम सभी को मिलेगा, बल्कि लंबे समय तक मजबूत और सार्थक संबंध बनाने में भी मदद करेगी. इससे निर्माण और विनिर्माण के क्षेत्र में कम कार्बन उत्सर्जन वाले और संसाधनों के दोबारा इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले तरीकों को तेजी से विकसित करने और अपनाने में मदद मिलेगी. यूनिवर्सिटी ऑफ सरे के एडवांस्ड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक और अकादमी के ‘ट्रांसफॉर्मिंग सिस्टम्स थ्रू पार्टनरशिप’ कार्यक्रम के अध्यक्ष, प्रोफेसर रवि सिल्वा ने कहा कि ट्रांसफॉर्मिंग सिस्टम्स थ्रू पार्टनरशिप कार्यक्रम ऐसे उपयोगी समाधानों को विकसित करने और उन्हें अमल में लाने में मदद करता है, जिन्हें बड़े पैमाने पर अपनाया जा सके और वास्तविक परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जा सके. इसके लिए ऐसे संबंधों को बढ़ावा दिया जाता है, जो किसी एक प्रोजेक्ट तक सीमित न रहें. (नीचे भी पढ़ें)
टाटा स्टील के साथ यह साझेदारी इसी सोच को आगे बढ़ाती है. भारत और ब्रिटेन के संस्थानों और विशेषज्ञता को एक साथ लाकर यह लंबे समय तक सहयोग को मजबूत करेगी. साथ ही, सस्टेनेबल, सर्कुलर और ऊर्जा-कुशल मटेरियल्स और प्रक्रियाओं को व्यावहारिक रूप से अपनाने के जरिए बुनियादी अवसंरचना की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी. इस तरह, इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नवाचार को अधिक मजबूत, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने वाली और सस्टेनेबल व्यवस्थाओं से जोड़कर यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भी योगदान देगी. रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के पहले से सफल ‘ट्रांसफॉर्मिंग सिस्टम्स थ्रू पार्टनरशिप’ (टीएसपी) कार्यक्रम के तहत इस साझेदारी के जरिए अप्रैल 2027 से दोनों देशों के चुने गए प्रोजेक्ट्स को तीन साल तक सहयोग दिया जाएगा. यह सहयोग भारत और ब्रिटेन की रिसर्च, इनोवेशन और औद्योगिक क्षेत्र की एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं को आगे बढ़ाएगा. पिछले एक दशक से भी अधिक समय में टीएसपी ने दुनिया भर के विश्वविद्यालयों और उद्योगों को जोड़ते हुए 300 से अधिक संयुक्त प्रोजेक्ट्स को सहयोग दिया है. इसके जरिए 800 से अधिक पुरस्कार विजेताओं का एक नेटवर्क भी तैयार हुआ है. (नीचे भी पढ़ें)
इस साझेदारी के तहत 15 तक रिसर्च और इनोवेशन प्रोजेक्ट्स को अनुदान मिलने की उम्मीद है. प्रत्येक प्रोजेक्ट को 100,000 से 150,000 ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग तक की राशि दी जाएगी और ये प्रोजेक्ट्स अधिकतम तीन साल तक चलेंगे. हर प्रोजेक्ट का नेतृत्व भारत और ब्रिटेन के एक-एक अकादमिक या रिसर्च पार्टनर मिलकर करेंगे. साथ ही, प्रत्येक प्रोजेक्ट के लिए यह स्पष्ट योजना होगी कि उसके नतीजों का इस्तेमाल उद्योग, उद्यमिता या अन्य व्यावहारिक क्षेत्रों में कैसे किया जा सकता है. फंडिंग के साथ-साथ, टाटा स्टील इन प्रोजेक्ट्स को उद्योग जगत की विशेषज्ञता और व्यावहारिक अनुभव का लाभ भी उपलब्ध कराएगी. इसके तहत वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन और कंपनी की लैब व अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने का अवसर मिलेगा. जिन प्रोजेक्ट्स में व्यावसायिक संभावनाएं होंगी या जिनके आधार पर नई कंपनियां शुरू की जा सकती हैं, उन्हें टाटा स्टील की ओर से मेंटरशिप और इन्क्यूबेशन सपोर्ट भी दिया जाएगा. यह सहयोग हर प्रोजेक्ट की जरूरतों और उसके उद्देश्य को ध्यान में रखकर तय किया जाएगा.





