जमशेदपुर : टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में कैंटीन की नयी व्यवस्था को लागू कर दिया गया. आनन फानन में लिये गये फैसले के तहत दो एजेंसियों को 50-50 फीसदी हिस्सा के कैंटीन को बांट दिया गया. पहले से जो कंपनी 20 से 30 फीसदी हिस्से में कैंटीन में सप्लाइ करती थी, उसके विपरित उसको 50 फीसदी हिस्से में सप्लाई करने का ठेका दे दिया गया. इसके बाद बुधवार को टाटा स्टील में खाने को लेकर कर्मचारियों को लाले पड़ गये. भूख से बिलबिलाये कर्मचारियों को नाश्ता और खाना तक नहीं मिल पाया. सारे विभागों में अफरा तफरी मची रही. स्थायी और अस्थायी और कांट्रैक्ट के कर्मचारियों में अफरा तफरी मची रही. सुबह का नाश्ता तक नहीं मिलने को लेकर जमकर हंगामा भी हुआ. (नीचे भी पढ़ें)

कई स्थानों पर नाश्ता और खाना नहीं पहुंचा. जिस कैंटीन में खाने की सामग्री पहुंची, वहां लूटमार की स्थिति हो गयी. इसको लेकर कर्मचारियों में मारामारी की स्थिति देखी गयी. टाटा स्टील के उच्चाधिकारियों से शिकायत की गयी जबकि टाटा वर्कर्स यूनियन के वाट्सएप ग्रुप पर सेंट्रल कैंटीन मैनेजमेंट कमेटी (सीसीएमसी) के पदाधिकारी नितेश राज को निशाना बनाया गया. कमेटी मेंबरों ने शिकायत की कि जी ब्लास्ट फर्नेस के कैंटीन में खाना तक नहीं पहुंचा. क्रेन ऑपरेटर बिना खाये ही क्रेन चलाने को मजबूर नजर आये. एलडी 3 में नाश्ता तक नहीं पहुंचा. आरएमबीबी 2 से लेकर तमाम विभाग में कर्मचारी खाने के सामान का कैंटीन में बैठकर इंतजार करते रहे. जब कैंटीन में खाना आया तो कर्मचारियों में आपाधापी मच गयी कि कहीं उनको लेट ना लग जाये. जी और एच ब्लास्ट फर्नेस में भी धक्का मुक्की देखी गयी. एलडी 3 के ट्राली प्वाइंट में नाश्ता सुबह 10 बजे तक नहीं पहुचा था. (नीचे भी पढ़ें)

एचएसएम में तो यह भी शिकायत मिली कि जहां खाना पहुंचा है, उसकी क्वालिटी काफी खराब थी. बताया जाता है कि बिना किसी तैयारी के ही कैंटीन में नयी व्यवस्था को लागू कर दिया गया था, जिस कारण परेशानियों का सामना करना पड़ा. कंपनी के भीतर कुल 15 बड़े कैंटीन है जबकि 104 ट्राली प्वाइंट है. बताया जाता है कि टाटा स्टील में पहले करीब 80 प्रतिशत कैंटीनों की जिम्मेदारी शौर्या इन को था जबकि शेष 20 प्रतिशत की जिम्मेदारी पुणे की सीएसएस एजेंसी के पास थी. शौर्या इन के लापरवाही के कारण और खराब क्वालिटी के कारण प्रबंधन ने दोनों एजेंसियों के बीच कैंटीनों की जिम्मेदारी 50 50 प्रतिशत बांट दी है. यह नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू की गई.





