
सरायकेला : आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड 29 की पार्षद सह पूर्व भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष स्वर्गीय राजमणी देवी के पार्थिव शरीर का पार्वती घाट में विधि विधान के साथ अंतिम संस्कार सम्पन्न हो गया. जहां बड़े बेटे मनमोहन सिंह राजपूत ने मुखाग्नि दी. राजमणी देवी के असामयिक निधन से भाजपा सहित पूरे सरायकेला और आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ पड़ी है. कल उनके मौत की सूचना मिलते ही आदित्यपुर कॉलोनी मार्ग संख्या- 9 स्थित आवास पर सांत्वना देनेवालों का तांता लगा रहा. भारतीय जनता पार्टी की ओर से पार्टी का झंडा ओढ़ाकर अंतिम विदाई दी गई. श्रद्धांजलि देने वालों में आदित्यपुर नगर निगम के मेयर विनोद कुमार श्रीवास्तव, डिप्टी मेयर अमित सिंह उर्फ बॉबी सिंह, भारतीय जनता पार्टी के जिला महामंत्री गणेश महाली, अनंतराम टुडू, राकेश मिश्रा, सतीश शर्मा, अमित सिंह, आदित्यपुर नगर परिषद की पूर्व अध्यक्ष राधा सांडिल, पूर्व उपाध्यक्ष पुरेंद्र नारायण सिंह, पार्षद रंजन सिंह, बोरजो राम हांसदा, राजरानी महतो, विक्रम किस्कू, सहित कई पूर्व एवं वर्तमान पार्षदों के साथ राजद नेता देव प्रकाश देवता, राजदलो नेत्री शारदा देवी, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिवाकर झा सहित कई क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने नम आंखों से राजमणी देवी को श्रद्धांजलि दी.

ऐसी थी अम्मा….
अम्मा के नाम से क्षेत्र में जानी जाती थी राजमणी देवी. कभी किसी से कुछ मांगा नहीं जो मिला खामोशी से स्वीकार किया, छिनने पर भी खामोश रहीं
अपनी अम्मा को जिताकर क्षेत्र की जनता ने विरोधियों से अपमान का बदला लिया
आदित्यपुर नगर परिषद के समय से नगर निगम तक के चुनाव में लगातार रिकॉर्ड मतों से विरोधियों को धूल चटाने वाली राजमणी देवी शुरू से ही भाजपा नेत्री रहीं. अपने स्वभाव और पार्टी के प्रति समर्पण के कारण जिस वक्त भाजपा महिला मोर्चा में कोई कद्दावर चेहरा नहीं था उस वक्त जिलाध्यक्ष उदय सिंहदेव ने महिला मोर्चा की कमान संभालने का प्रस्ताव रखा, जिसे उन्होंने स्वीकार कर जिले में महिला मोर्चा को सशक्त बनाने का बीड़ा उठाया और लगातार पार्टी में महिलाओं को जोड़ना शुरू किया पार्षद रहते हुए अपने वार्ड के साथ-साथ पूरे जिले की कमान को बखूबी निभाया. विपक्षियों से ज्यादा अपने दल के लोगों ने राजमणी के साथ भीतराघाट किया और साजिश के तहत जिलाध्यक्ष पद छीन लिया. जिसे खामोशी से सहते हुए बगैर ओछी बयानबाजी के चुपचाप सहन कर पार्टी के झंडे को बुलंद रखा. कभी भी पार्टी के अनुसाशन को नहीं तोड़ा. नगर निगम चुनाव में अपने ही दल के लोग विरोध में खड़े होकर उन्हें पछाड़ने में लग गए लेकिन यहां यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि, खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थीं… चुनाव परिणाम आते ही सभी विरोधी चारों खाने चित्त नजर आए. और लगातर तीसरी बार पार्षद बनने का सेहरा अपने सर पर बांधने का श्रेय अपने वार्ड की जनता को देकर अपनी पीड़ा को भूलकर क्षेत्र में विकास के लिए शुरू कर दिया अपना अभियान, लेकिन नियति को शायद ये मंजूर नहीं था और इस शेरनी को खामोश करने के लिए ऐसी बीमारी शरीर को लग गई जिसने किसी को आजतक मौका ही न दिया.

आज राजमणी देवी का साया वार्ड से उठते ही उनके वार्ड के लोग खुद को अनाथ महसूस करने लगे. जब भी अम्मा ने आवाज लगाई वार्ड की जनता उनके साथ कदम से कदम मिलाकर उनका साथ दिया. अम्मा ने भी नगर निगम से लेकर तमाम सरकारी विभागों से विकास का फंड अपने वार्ड में लड़कर या अधिकार के साथ लाने का काम किया. हर कोई यही कहता नजर आया कि इतनी खामोशी के साथ मौत को गले लगा लिया एक आवाज तो लगाई होती. निश्चित तौर पर बीते 1 साल से यानि नगर निगम का कार्यकाल शुरू होते ही राजमणी कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी की चपेट में आ गई. पहले मुंबई में इलाज हुआ उसके बाद अचानक फिर से इस बीमारी ने पूरे शरीर को अपने आगोश में ले लिया. अंततः दिल्ली के एम्स में इलाज शुरू हुआ, लेकिन वहां कुछ दिन ईलाज के बाद डॉक्टरों ने जवाब दे दिया और दिल्ली से वापस जमशेदपुर लौटने के दौरान रास्ते में ही राजमणी ने दम तोड़ दिया. शायद राजमणी हारी, थकी और लाचार बनकर अपने क्षेत्र की जनता के पास नहीं आना चाहती थी.



