
जमशेदपुर : टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन को भरोसे है कि कोरोना के कारण लगभग दो साल के वित्तीय वर्ष में काफी न्यूनतम विकास हुआ है और कारोबारी लिहाज से पूरी तरह दुरुस्त नहीं रहा है. लेकिन अब धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे है. ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है कि फिर से निवेश की पुर्नचक्र फिर से तेज रफ्तार के साथ शुरू हो जायेगी. आने वाले एक साल में जरूर इसमें सुधार हो सकेगा. श्री नरेंद्रन एक अंग्रेजी अखबार को दिये गये इंटरव्यू में यह बातें कहीं. वे बजट से उम्मीदों पर बोल रहे थे. टाटा स्टील के एमडी सह सीइओ टीवी नरेंद्रन ने कहा कि भारत सररकार के कई सारे कदम है, जिसने मैनुफैक्चरिंग सेक्टर को आगे लाने में काफी मददगार साबित हुआ है, लेकिन इसको और बेहतर करने के दिशा में जरूर सरकार कदम उठायेगी, ऐसी उम्मीद है. उन्होंने कहा कि जब निर्माण के क्षेत्र में निवेश बढ़ता है तो पूरा इको सिस्टम ही बढ़ने लगता है. ऐसा हम लोगों ने बीते 20 से 30 साल में ऑटो इंडस्ट्री में जरूर देखने को मिला है. उन्होंने बताया कि वर्ल्ड क्लास ऑटो कंपोनेंट मैनुफैक्चरिंग एरिया में यह सिस्टम विकसित होते देखा है और आने वाले सालों में अन्य क्षेत्रों में बदलाव की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि ऐसी उम्मीद है कि काफी ज्यादा कोविड सरचार्ज सरकार द्वारा किया जा सकता है. इसके अलावा संसाधनों के निर्माण में भी और सुधार होने की उम्मीद है. उनसे कुछ ऐसे दो से तीन सुझाव भी मांगे गये, जिसके जरिये देश के विकास को प्रगति मिल सकेगा और नौकरियों का सृजन भी हो सकेगा. इस पर टाटा स्टील के एमडी ने कहा कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश को बढ़ावा देने वाले कदम उठायेगी तो उसके सकारात्मक पहलु सामने आ सकते है. इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश होने से कई तरह के प्रोडक्ट जैसे स्टील, सीमेंट इत्यादि कंपनियों के विस्तार में बढ़ोत्तरी होती है. इससे शहरी क्षेत्रों के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी कामकाज तेज हो जाता है. जहां इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण के क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, वैसे ही रोजगार के उपाय भी सृजित होने लगेंगे. इस कारण लोगों तक पैसे पहुंचाने का एक सरल माध्यम सरकार द्वारा कंस्ट्रक्चर सेक्टर को बढ़ावा देना होगा, जिससे कई सारे उत्पादों का डिमांड बढ़ सकता है. वैसे भी निर्माण क्षेत्रों में काम बढ़ने से फैक्ट्री गेट के बाहर भी प्रतिस्पर्धा में बढ़ोत्तरी हो सकेगा. इसके अलावा फैक्ट्री के गेट के भीतर भी प्रतिस्पर्धा बढ़ता है. इसके लिए केंद्र और राज्य की सरकारों को मिलकर संसाधनों (इंफ्रास्ट्रक्चर) में विस्तार किया जाना चाहिए. इसके अलावा सरकारों को इज ऑफ डूइंग बिजनेस के क्षेत्र में और बेहतर काम करते रहने की जरूरत है. भारत में सरकारें इज ऑफ डूइंग बिजनेस के क्षेत्र में बेहतर काम कर रही है क्योंकि पैसे का मोल भारत में काफी ज्यादा है जबकि समय की भी कीमत ज्यादा है. जितना ज्यादा क्लियरेंस लेने और जमीन के अधिग्रहण में समय लगेगा, उतना ज्यादा फैक्ट्री बनने में देरी होगी, जिससे और ज्यादा नुकसान ही होगा. उन्होंने उम्मीद जतायी कि देश में जरूर निजी क्षेत्रों में निवेश में बढ़ोत्तरी होगा.





