आदित्यपुर : शुक्रवार को सरायकेला-खरसावां जिला पुलिस ने पूर्व विधायक मलखान सिंह के साले और चर्चित ठेकेदार कन्हैया सिंह हत्याकांड का खुलासा कर दिया है. हत्याकांड के उद्भेदन के बाद जिला पुलिस ने राहत की सांस ली है. पुलिस ने कन्हैया सिंह की बेटी अपर्णा सिंह, उसके कथित प्रेमी राजवीर सिंह हंसपाल, शूटर निखिल गुप्ता व एक नाबालिग को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. हालांकि अभी भी दो अपराधकर्मी राजू दिग्गी उर्फ डिक्की एवं रवि सरदार पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. बीते 29 जून के बाद से कोल्हान की राजनीति में आया तूफान शुक्रवार को पुलिस के खुलासे के बाद थम गया. हर कोई हैरान परेशान है. कल तक जो चीख-चीखकर पुलिस प्रशासन को गालियां दे रहे थे, आज सभी नि:शब्द हैं. जिस तरह से कांग्रेसी नेताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला था, जिला अध्यक्ष के पुत्र के इस हत्याकांड में फंसने के बाद कांग्रेस बैकफुट पर है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा से लेकर आदित्यपुर कांग्रेस नगर अध्यक्ष सभी खामोश हैं. किसी को इस बात का तनिक आभास नहीं था, कि कन्हैया सिंह की हत्या की साजिश कन्हैया सिंह के घर में ही रची गई और इसमें उनकी बेटी की भूमिका अहम रही. बहरहाल पुलिस ने कन्हैया सिंह हत्याकांड का खुलासा जरूर कर दिया है, मगर ऐसे कई सवाल लोगों के जेहन में कौंध रहे हैं जो यक्ष प्रश्न बना हुआ है. क्या वाकई कन्हैया सिंह की बेटी अपने पिता की हत्या में शामिल थी ? वैसे पुलिस दावा कर रही है कि उसके पास तकनीकी साक्ष्य पर्याप्त मात्रा में मौजूद है, जिससे यह साबित किया जा सकता है, कि कन्हैया सिंह की बेटी कन्हैया सिंह के हत्याकांड में शामिल थी. मगर ऐसा भी तो हो सकता है, कि राजवीर ने अपने मां-बाप के अपमान का बदला लेने के उद्देश्य से अपर्णा को मोहरा बनाकर उसके ”टीनएज” का फायदा उठाया हो. वैसे ऐसा हम नहीं बल्कि पुलिस द्वारा दिए गए प्रेस नोट में इस बात का जिक्र है, जिसमें यह दावा किया गया है, कि कन्हैया सिंह को जब अपर्णा और राजवीर के बीच संबंध का आभास हुआ था, तब कन्हैया सिंह ने राजवीर के साथ मारपीट की थी और उसके माता-पिता को जलील कर आदित्यपुर छोड़ने को विवश किया था. इसके बाद राजवीर के माता-पिता आदित्यपुर मांझी टोला का पुश्तैनी मकान बेचकर मानगो में किराए पर रहने चले गए थे. तो क्या राजवीर उसी अपमाम का बदला लेने के लिए अपर्णा के जज्बात को प्रेम फांस में बांधकर उससे कन्हैया सिंह का लोकेशन लेकर निखिल के जरिए कन्हैया सिंह को रास्ते से हटा दिया ? खैर पुलिस ने जो तर्क दिए हैं उससे तो साफ होता है, कि अपर्णा कन्हैया सिंह के हत्या की राजदार थी और हत्या के बाद पुलिस को गुमराह कर रही थी. गिरफ्तारी के बाद खुद अपर्णा भी परेशान नजर आ रही थी और यह भी कहती सुनी गयी, कि उसने अपने पापा की हत्या नहीं करवाई है उसे मोहरे के रूप में प्रयोग किया गया है. वह नर्वस नजर आ रही थी, जिस कारण पुलिस ने उसे मीडिया के सामने नहीं लाया. यहां एक सवाल लोगों के जेहन में और कौंध रही है. वो ये कि निखिल गुप्ता ने इतनी हिम्मत कहां से जुटा ली, कि कन्हैया सिंह जैसे शख्सियत की हत्या करने की ठान ली. जैसा कि पुलिस ने बताया कि सुपारी किलिंग की बात सामने नहीं आई है. अपर्णा सिंह की हीरे की अंगूठी निखिल के पास से बरामद होने की बात सामने आयी है. मगर अपर्णा सिंह ने वह अंगूठी निखिल को दी थी, या अपने बॉयफ्रेंड राजवीर को दी थी, जिसे राजवीर ने निखिल को बतौर पेशगी, या यूं कहें सुपारी के रूप में निखिल को दी थी, यह भी यक्ष प्रश्न है. वैसे कन्हैया सिंह की हत्या में ऑनर किलिंग की बात अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है. फिर निखिल इतना बड़ा रिस्क कैसे ले सकता है ! आखिर निखिल का कन्हैया सिंह के साथ क्या दुश्मनी था यह भी एक राज है. निखिल हिस्ट्रीशीटर अपराधी जरूर था मगर हत्या जैसे संगीन मामले में वह जेल अंतिम बार कब गया था इसे भी गौर करने की जरूरत है.





