
आदित्यपुर: एक तरफ झारखंड सरकार आदिवासियों- मूलवासियों के जल- जंगल और जमीन पर अधिकार का दावा करती है. वहीं यहां के आदिवासियों मूलवासियों से नौकरी और मुआवजा का सब्जबाग दिखाकर उनकी जमीनों को उद्यमियों और पूंजीपतियों द्वारा अधिग्रहण करने के कुछ दिनों बाद वादा खिलाफी करते हुए जमीन किसी और को हस्तांतरित कर दिया जा रहा है. उसके बाद आदिवासी- मूलवासी अपने जमीन और नौकरी दोनों गंवाने के बाद आंदोलन के राह पर चल पड़ते हैं. जहां तारीख पर तारीख, आश्वासन और सांत्वना के बीच आदिवासी मूलवासी पिसे जाते हैं. मामला नहीं सुलझता. ताजा मामला सरायकेला जिले के आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित वल्लभ स्टील के जमींदाताओं का है. आपको बता दें कि उक्त कंपनी के स्थापना को लेकर दुग्धा पंचायत के आमडीह के 350 मूल रैयतों ने नौकरी और मुआवजा के लोभ में अपनी पुश्तैनी जमीन दी थी. इसमें 207 मूल रैयतों को नौकरी भी मिली. उसके बाद कंपनी ने पहले उषा मार्टिन को अपना जमीन हस्तांतरित कर दिया.
वही उषा मार्टिन का 2019 में टाटा स्टील लोंग प्रोडक्ट्स डिवीजन ने अधिग्रहण कर लिया. जिसमें सभी जमीन दाताओं को रोजगार दिए जाने का भरोसा दिलाया गया, लेकिन अधिग्रहण के बाद टाटा स्टील लोंग प्रोडक्ट्स अपने वायदे से मुकर गया. नतीजा सभी मूल रैयत बेरोजगार हो गए. जहां बीते 1 मार्च से मूल रैयत कंपनी गेट जाम कर अपनी जमीन वापसी की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं. इधर बुधवार को जमीन दाता जिला मुख्यालय पहुंचे. जहां इन्होंने जिले के उपायुक्त से अपनी जमीन वापस दिलाए जाने संबंधी मांग पत्र सौंपा. वैसे पिछले दिनों कांग्रेस ने इन मूल वासियों की मांग को जायज बताते हुए इनका समर्थन किया था, और सरकार से इनका हक दिलाने का भरोसा दिलाया था, लेकिन आज तक इन मजदूरों का कोई फैसला नहीं हुआ है. हालांकि बुधवार को ज्ञापन सौंपने के दौरान कांग्रेस जिला अध्यक्ष छोटेराय किस्कू भी जमीन दाताओं के साथ मौजूद रहे.



