
राजन सिंह
बहरागोड़ा : किसी भी क्षेत्र के विकास की कुंजी सड़क को माना जाता है. राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार आधारभूत संरचना सड़क निर्माण के लिए प्रति वर्ष अरबों की राशि खर्च कर रही है, वहीं कई विभागों में विकास की राशि खर्च नहीं होने के कारण सरेंडर हो जा रही है, मगर आज भी कई ऐसे गांव हैं, जहां छोटी-छोटी सड़कें लोगों की परेशानी का सबब बन कर रह गयी हैं. बहरागोड़ा प्रखंड के बरशोल थाना क्षेत्र के छोटा कुलिया गांव से गामारिया गांव तक जाने वाली सड़क काफी जर्जर है. सड़क का निर्माण नहीं होने से ग्रामीण और राहगीरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. वर्षो से सड़क की मरम्मत नहीं होने से लोगों का सड़क पर चलना दूभर हो गया है. मरम्मत के अभाव में सड़क अपने अस्तित्व को बचाने में स्वयं संघर्षरत है. बरसात के दिनों में सड़क पर उभरे गड्डो में जल जमाव होने से सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है. इस सड़क से कई गांवों के ग्रामीण आना-जाना करते हैं. सड़क की मरम्मत करने की दिशा में किसी के पहल नहीं करने पर रविवार को गांव के ग्रामीणों ने खुद श्रमदान कर सड़क की मरम्मत की. ग्रामीणों ने खुद हाथों में कुदाल और फावड़ा थामकर घंटो सड़क पर पसीना बहाया और श्रमदान कर सड़क पर उभरे गड्डों में मिट्टी डालकर भर दिया. देखते ही देखते सड़क ग्रामीणों के चलने लायक बन गयी. ग्रामीणों ने कहा कि वे सभी श्रमदान कर सड़क को चलने लायक बना रहे हैं.

विदित हो की छोटा कुलिया, काशिडिंगा और गामारिया गांवों की यह सड़क जगन्नाथपुर से ब्राह्मणकुंडी जाने वाली मुख्य सड़क से जोड़ती है. एक किमी लंबी मुख्य सड़क जो वर्षों से जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण जर्जर थी, सड़क निर्माण के लिए ग्रामीण कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधि को भी अवगत करा चुके हैं, पर कोई लाभ नहीं हुआ. ग्रामीणों ने कहा वोट आते ही गांव में नेताओं का आगमन शुरू हो जाता है और वोट खत्म होने के बाद कोई भी नेता दोबारा गांव नहीं आते हैं. मजबूरन ग्रामीणों ने स्वयं श्रमदान कर सड़क की मरम्मत कार्य को पूरा करने का बीड़ा उठाया. दर्जनों ग्रामीणों ने सड़क पर मिट्टी, मोरुम डाल कर मरम्मत की. साथ ही सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे को भर कर आवाजाही लायक बना डाला. श्रमदान में मुख्य रूप से भागन मुंडा, पाइलट मुंडा, मुन्ना मुंडा, अशोक मुंडा, दीपक मुंडा, दिनेश मुंडा, संजय मुंडा, सौरभ मुंडा, शत्रुघन मुंडा, धिरा मुंडा, बरुण मुंडा, रामन मुंडा, राजु मुंडा, शिवशंकर मुंडा, माखन मुंडा, रतन मुंडा, नीबारन मुंडा, एकादसी मुंडा, लाल्टू मुंडा, नरेन मुंडा,रुपबान मुंडा समेत अन्य ग्रामीण शामिल थे.







