- वर्ष 2012 से विवाद में रही है सुभाष पार्क से सटी सैरात भूमि
- मकर संक्रांति के पूर्व कोलकाता के व्यापारी इस भूमि पर लगाते हैं कपड़े की दुकान
- प्रतिद्वंद्विता के कारण नीलामी की राशि 18,65,375 से पहुंची 25,75,000

बहरागोड़ा : यहां विवादों का मुख्य कारण रही नेताजी सुभाष उद्यान से सटी सैरात भूमि ( हावड़ा हाट) ने वर्ष 2020 की नीलामी में अप्रत्याशित रूप से सात लाख की छलांग लगाई है. वर्ष 2012 में इस भूमि की नीलामी 1,52, 500 से शुरू हुई थी। 2019 पंकज कर ने 18, 65, 275 की बोली लगाकर हाट को अपने नाम किया था. वहीं पिछले दिनों जमशेदपुर में हुई नीलामी में गौरी शंकर महतो ने 25,75, 000 की बोली लगाकर हाट को अपने नाम कर लिया. इस तरह इस वर्ष हावड़ा हाट ने सात लाख की ऊंची छलांग लगायी. बता दें कि इसी भूमि के कारण यहां पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती दो जगहों पर मनाई जाने लगी. इस भूमि पर ग्रामीण विकास मेला कमेटी वर्षों से नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर प्रति वर्ष मकर संक्रांति के पूर्व हावड़ा हाट लगाया करती थी. इस हाट में कोलकाता के कपड़ा व्यापारी दुकान लगाते थे. तब इस भूमि की नीलामी नहीं हुआ करती थी. हावड़ा हाट से प्राप्त आय ग्रामीण विकास मेला कमेटी मेला के आयोजन में खर्च करती थी. वर्ष 2011 में इस भूमि को लेकर विवाद खड़ा हुआ. कुछ लोगों ने इस भूमि की नीलामी करने की मांग प्रशासन से की. काली संघ मैदान में सुभाष जयंती समारोह मनाने के लिए तब तक बहरागोड़ा जन संघर्ष मोर्चा का गठन हो चुका था. इस भूमि की पहली नीलामी वर्ष 2012 में हुई। अंचल कार्यालय में हुई तब की नीलामी में ग्रामीण विकास मेला कमेटी और जन संघर्ष मोर्चा के लोगों ने भाग लिया. सबसे अधिक बोली जन संघर्ष मोर्चा के बाप्तु साव ने 1,52, 500 की बोली लगाकर सैरात भूमि को अपने नाम किया. जन संघर्ष मोर्चा द्वारा हावड़ा हाट लगाई गई. इस दौरान ग्रामीण विकास मेला कमेटी और जन संघर्ष मोर्चा के सदस्यों के बीच मारपीट तक की नौबत आ गई और मामला थाना भी पहुंच गया. वर्ष 2013 में ग्रामीण विकास मेला कमेटी के सनत मंडल ने 4.90 लाख की बोली लगाकर भूमि को अपने नाम किया था. वर्ष 2014 में जन संघर्ष मोर्चा के दीपेन मन्ना ने 9.72 लाख की बोली लगाकर भूमि को अपने नाम किया था. उसके बाद दोनों ही कमेटियां नीलामी की प्रक्रिया में भाग लेने से कतरा गयीं. भूमि की नीलामी नहीं हुई. ऐसी स्थिति में प्रशासन ने अपने स्तर से लगातार चार साल हावड़ा हाट में राजस्व की वसूली की. इन दोनों कमेटियों की प्रतिद्वंद्विता के कारण वर्ष 2019 में जिला परिषद के तहत हुई नीलामी में दोनों कमेटियां के लोग पीछे हट गये और पंकज कर ने 18,65,275 की बोली लगाकर उक्त भूमि को अपने नाम कर लिया.







