
Chakuliya : चाकुलिया के नामोपारा स्थित रास मंच पूजा सेवा कमिति के तत्वावधान में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा मंगलवार को आरंभ हुई. पहले दिन कथा वाचन करते हुए देव कन्या साध्वी सुगणा बाई सा ने कहा कि एक जन्म नहीं, कई जन्मों के पुण्य फल है, जो इस जीवन में भागवत कथा सुनने और गाने का अवसर मिला है. भागवत कथा श्री हरि के मुखारविंद से प्रकट हुई है. भागवत कथा से मनुष्य जीवन का उद्धार होता है. गंगा हमारे तन का पाप धोती है और भागवत हमारे मन के पापों का नाश कर गंदगी को धोती है. भागवत ज्ञान की गंगा है. इसमें जितना डूबोगे उतना आनंद आयेगा. जो मनुष्य अपने कान से भागवत कथा न सुने, उसका कान सर्प की बिल कि भांति है. जीवन मिला है, तो प्रभु का ध्यान करें. जीवन का सदुपयोग करें. तभी जीवन सफल होगा. आज प्रेम का अर्थ ही बदल गया है. प्रेम वह है जहां नि:स्वार्थ और समर्पण का भाव हो. वही सच्चा प्रेम है. भागवत हमें प्रेम और भक्ति के भाव की सीख देती है. प्रभु का चिंतन करो. प्रेम करो. प्रभु भक्तों की भक्ति से बंध जाते हैं. उन्होंने कहा कि सत्य ,चित्त और आनंद भगवान के तीन स्वरूप हैं. आत्मा से परमात्मा चाहिए, तो प्रभु के नाम का जाप करो. अगर किसी को दुखी देख मन दुखी हो जाये, तो समझें कि मन में आज भी इंसानियत जिंदा है. सत्य संतों का जीवन में कुछ क्षण के लिए साथ मिल जाये, तो जीवन सार्थक हो जायेगा. भागवत कथा सुनना ही जीवन का सत्य कर्म है.

उन्होंने कहा कि श्रोता वह है जो कथा सुने और कथा के अर्थ को जीवन में उतारे. वही सही मायने में श्रोता होते हैं. कथा सुनने शून्य भाव से आओ. कथा में सभी समान हैं. संभाव बन कर कथा स्थल पहुंचें. कथा सुनने मात्र से ज्ञान और वैराग्य जागृत होता है. प्रेम में बहुत ताकत होती है. जिसे पद, पैसा और ताकत से हल नही किया जा सकता उसे प्रेम से हल किया जा सकता है. संत कहते हैं, हमेशा प्रेम की भाषा बोलो, सबसे प्रेम करो, तो जीवन सफल होगा. जीवन में संस्कार का होना जरूरी है. जीवन में शिक्षा के साथ ही संस्कार होना जरूरी है. अन्यथा सारा जीवन और शिक्षा बेकार है. घर प्रेम का मंदिर है. घर में भगवान रहते हैं. घर के अंदर कलह और अशांति न लायें. उन्होंने कहा कि जब मन में गुस्सा हो, तो प्रभु का कीर्तन करो, मन शांत हो जायेगा. कथा के पहले दिन कथा सुनने के लिए मंदिर परिसर में श्रोताओं की भीड़ उमड़ पड़ी. पूरा गांव भक्तिमय हो गया. लोगों ने हरिनाम जपते हुए भागवत कथा का श्रवण किया. इस अवसर पर सुधीर चन्द्र बेरा, पतित पावन बेरा, लखी नारायण दास, चन्द्रदेव महतो, शंकर रुंगटा, देवदास पंडा, पंकज दास, पशुपति बेरा, कमल बेरा, हागरू दास, चंदन दास, तापस दास, शेखर चन्द्र बेरा, मानस दास, सुकुमार दास समेत अनेस श्रोता उपस्थित थे.




