
जमशेदपुर / धालभूमगढ़ : धालभूमगढ़ प्रखंड के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) एक पत्र निर्गत कर प्रखंड में संचालित 80 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को आदेश दिया है, जिसमें सभी 15 अप्रैल 2020 से 31 मई 2020 तक सभी छात्रों के लिए बंद अवधि के लिए वर्ग 1 से 5 वी तक के 4.97 की दर से और वर्ग 6-7 के लिए 7.45 की दर से कुल 37 दिनो के लिए मध्यान भोजन का और 6 रूपये की दर से 11 दिनों के लिए फल और अंडा की राशी छात्र-छात्राओं के खाते में खातांतरित करने का आदेश दिया है. इसके साथ ही पत्र में बीईओ ने एमडीएम ऑपरेटर व बीपीओ के प्रति ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, जिस पर अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने आपत्ति जताते हुए अनुचित ठहराया है. साथ ही उपयोगिता प्रमाण पत्र सीधे बीईओ कार्यालय में जमा करने के निर्देश को नियम विरुद्ध बताया है.

क्या है बीईओ के पत्र में
कहा कि जिला शिक्षा अधीक्षक जमशेदपुर के पत्रांक 1202 दिनांक 13 जुन मैं वर्णित एक जुन से 30 जुन तक कुल 23 दिन भोजन दिवस का वर्ग 1 से 5 तक 4.97 और वर्ग 6 से 8 वी तक के लिए 7.45 रूपये की दर से मध्यान भोजन की राशि और 12 दिनों का छो रूपये की दर से छात्र छात्राओं के बैंक खाता में राशी खातांतरीत करना है. वर्ग एक से पांचवीं तक के लिए 100 ग्राम और वर्ग छह से आठवीं तक के लिए 150 ग्राम की दर से कुल 60 दिनों का चावल वितरण करना है. सभी विद्यालयों के द्वारा 14 अप्रैल 2020 तक मध्याह्न भोजन की राशि, फल और अंडा की राशि और चावल वितरण किया गया है. सभी प्रधानाध्यापकों को आदेश दिया गया है कि अप्रैल 2020 से 30 जून 2020 तक मध्याह्न भोजन अंडा ,फल की राशि चावल वितरण कर अप्रैल 2020 से 30 जून तक तीनों माह का उपयोगिता प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी के हाथों में हार्ड कॉपी जमा करें. एमडीएम ऑपरेटर और बीपीओ के झांसे में न पड़ें. प्रधानाध्यापकों से कहा गया है कि वे सभी 20 जून तक उपयोगिता जमा कर दें.
अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ की आपत्ति
प्रखंड के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी द्वारा निर्गत पत्र में कहा गया है कि ‘एमडीएम ऑपरेटर और बीपीओ के झांसे में न पड़ें’. इस पर अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने आपत्ति जतायी है. इस संबंध में संघ ने उपायुक्त, जिला शिक्षा पदाधिकारी व जिला शिक्षा अधीक्षक से लिखित शिकायत की है. उपायुक्त, जिला शिक्षा पदाधिकारी व जिला शिक्षा अधीक्षक जिले में झारखंड शिक्षा परियोजना के क्रमश: अध्यक्ष, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी व अपर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी होते हैं. संघ ने कहा है कि किसी पदाधिकारी द्वारा पत्र में इस तरह की भाषा का प्रयोग उचित नहीं कहा जा सकता है. अगर उन्हें एमडीएम ऑपरेटर या बीपीओ से किसी तरह की शिकायत थी, तो संबंधित प्रतिवेदन वरीय अधिकारियों को देना चाहिए था. किसी के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते हुए पत्र जारी नहीं किया जाना था. दूसरी ओर संघ ने कहा है कि विद्यालय संबंधी कोई भी प्रतिवेदन संबंधित संकुल साधन सेवी (सीआरपी) के माध्यम से पूर्व से निर्देश है. बावजूद उक्त बीईओ द्वारा सभी विद्यालयों से स्वयं प्रतिवेदन लिया जाना कई शंकाओं को जन्म देता है.







