- सरकारी शिक्षकों के जिम्मे गैर शैक्षणिक कार्य का भारी बोझ, ऐसे में नहीं मिलेगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा : शिक्षा सत्याग्रह

जमशेदपुर : कोरोना संकट के बीच सरकारी शिक्षकों के जिम्मे गैर शैक्षणिक कार्यों का भारी बोझ है। इससे सरकारी स्कूलों के बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बाधक है। सरकारी शिक्षकों पर मिड डे मील के अंतर्गत बच्चों के लिए चावल वितरण की जिम्मेदारी तो थी ही, ऊपर से अब उन पर राशनकार्ड जांच करने का बोझ भी लाद दिया गया है। जिले के कई शिक्षकों को जनवितरण प्रणाली के राशन स्टोरों की निगरानी के लिए भी प्रतिनियुक्ति की गई है। ऐसे में शिक्षकों के शोषण और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना तो लाजमी है। शिक्षकों की गैर शैक्षणिक कार्यों में प्रतिनियुक्ति को अनुचित करार देते हुए शिक्षा सत्याग्रह ने इस पर सवाल उठाया है। साथ ही मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से आवश्यक हस्तक्षेप की मांग की है। शिक्षा सत्याग्रह के संस्थापक और भाजपा नेता अंकित आनंद ने बुधवार को प्रदेश के सीएम और शिक्षा मंत्री को पत्र लिखते हुए सरकारी शिक्षकों के जिम्मे गैर शैक्षणिक काम के भारी बोझ पर चिंता जाहिर करते हुए अविलंब रोक लगाने की मांग की है। पत्र में उल्लेख है कि शिक्षकों को मिड डे मील के चावल वितरण सहित राशनकार्ड जांचने और जनवितरण प्रणाली की दुकानों की निगरानी जैसे जैसी जिम्मेदारीयां सौंप दी गई है। एक ओर सरकार ऑनलाईन कक्षा संचालन करने की बात कर रही है तो दूसरी ओर शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाकर उनका शोषण किया जा रहा है। इससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित हो रही है। शिक्षा सत्याग्रह के संस्थापक अंकित आनंद ने कहा कि पूर्व में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास की सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा सभी जिलों के उपायुक्तों को यह आदेश निर्गत किया गया था कि सरकारी शिक्षकों की सेवा गैर शैक्षणिक कार्यों में नहीं ली जानी चाहिए। इसके बावजूद राशनकार्ड जांचने इत्यादि कार्यों में शिक्षकों को लगाया जा रहा है। इस मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो को ई-मेल के माध्यम से पत्र भेजकर शिक्षा सत्याग्रह के अंकित आनंद ने सर्वोच्च प्राथमिकता सहित इस पर रोक लगाने का आग्रह किया है।







