जमशेदपुर: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी छात्र एकता केंद्रीय कमेटी की ओर से रविवार को बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में जनसभा का आयोजन किया गया. सभा में आदिवासी समाज की पहचान, संवैधानिक अधिकार, संस्कृति और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया. बड़ी संख्या में छात्र, युवा और समाज के लोग कार्यक्रम में शामिल हुए. जनसभा के दौरान संगठन ने सरना धर्म कोड लागू करने, आदिवासी बहुल क्षेत्रों को उचित संवैधानिक संरक्षण देने और चाय जनजातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग की. (नीचे भी पढ़े)
इसके साथ ही निजी क्षेत्र में स्थानीय युवाओं के लिए 75 प्रतिशत रोजगार सुनिश्चित करने तथा मुंडारी, कुड़ुख और भूमिज समेत आदिवासी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग भी रखी.वक्ताओं ने पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में लैंड बैंक नीति समाप्त करने की मांग करते हुए सीएनटी-एसपीटी एक्ट, पेसा और विल्किंसन रूल का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि आदिवासी जमीन की सुरक्षा और पारंपरिक अधिकारों का संरक्षण समाज के अस्तित्व से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है. (नीचे भी पढ़े)
संगठन के नेताओं ने कहा कि आदिवासी समाज लंबे समय से अपने संवैधानिक और पारंपरिक अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहा है. जल, जंगल और जमीन के साथ आदिवासी संस्कृति, भाषा और पहचान की रक्षा भी जरूरी है. इन मुद्दों को लेकर संगठन भविष्य में भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखेगा.कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज की एकजुटता, अधिकारों के प्रति जागरूकता और संवैधानिक प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया. जनसभा में मौजूद लोगों ने विभिन्न मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की.




