जमशेदपुर : जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित डीडी बार के बाहर हुई हत्याकांड और कातिलाना हमला के मामले में पुलिस की टीम लगातार छापामारी कर रही है. इस मामले में नौ लोगों की गिरफ्तारी कर ली गयी है. इस कांड में डायरेक्टर जिसका संबंध नहीं है, वो भी गिरफ्तार हो चुका है. लेकिन अब तक पुलिस के हाथ इस कांड का मुख्य अपराधी और फरार विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा पकड़ा नहीं जा सका है. सरायकेला खरसावां जिले के गम्हरिया निवासी विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा पर पुलिस ने दो लाख रुपये का ईनाम भी घोषित कर रखा है. लेकिन वह फरार ही है. पुलिस अब तक उसके बारे में पता नहीं लगा पायी है. बोदरा तक पुलिस आखिर क्यों नहीं पहुंच पायी है. वहीं, इस मामले में अब तक वैसे पुलिसवालों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया है, जो लोग उस वक्त हत्याकांड की गवाह थे. (नीचे भी पढ़ें)

पुलिसवालों के सामने पुलिस की जीप से खींचकर अपराधियों ने चापड़ से मारकर हिमांशु को मौत के घाट उतार दिया था जबकि प्रत्युष आनंद आज भी जिंदगी और मौत से जूझ रहा है. चार पुलिसवालों और बिष्टुपुर थाना प्रभारी को सस्पेंड किया गया. लेकिन अब तक उन पुलिसवालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा क्यों नहीं दायर किया गया, जो लोग उस कांड को अपनी आंखों के सामने सरकारी पिस्तौल और राइफल लेकर थे और उनके सामने हत्यारे ताबड़तोड़ चापड़ से हमला कर रहे थे. उन पुलिसवालों को अब तक क्यों नहीं आरोपी बनाया गया, जो लोग आधे घंटे तक दोनों लड़कों को सड़क पर तड़पता छोड़ दिये थे और उनको टीएमएच तब ले जाया गया, जब उनके लोग वहां नहीं आये. ऐसे पुलिसवालों पर क्यों नहीं कार्रवाई की गयी, जो पुलिसवाले अपनी जीप से उनको घायल हालत में अस्पताल तक नहीं पहुंचा पाये और दोनों घायल युवक अपने परिचितों के आने के बाद परिचितों की गाड़ी में ले जाये गये. ऐसे दोषियों को क्या सस्पेंसन की कार्रवाई पर्याप्त है. इसका भी जवाब जनता चाहती है. आपको बता दें कि हिमांशु के पिता और आम जनता ने जो आंदोलन किया था, उसमें दोषी पुलिसवालों पर हत्या का मुकदमा चलाने का डिमांड भी था. लेकिन अब तक वह डिमांड पूरा होता नजर नहीं आ रहा है.






