जमशेदपुर : प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी सीएसआइआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला में ”हिन्दी सप्ताह समारोह 2025“ का आयोजन 01 सितम्बर से 08 सितम्बर, तक हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया. इस दौरान विभिन्न कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ. हिंदी सप्ताह समारोह के शुभ अवसर पर सीएसआइआर – राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला के ऐतिहासिक प्रेक्षागृह में कवि सम्मेलन आयोजित हुआ. इस अवसर पर प्रयोगशाला के निदेशक डॉ संदीप घोष चौधुरी ने अपने संबोधन में कहा कि हम सब एकत्रित हैं एक भव्य कवि सम्मेलन के लिए. यह अवसर केवल कवियों और श्रोताओं का संवाद नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव है. (नीचे भी पढ़ें)

उन्होंने कहा कि कविता मनुष्य की आत्मा की अनिवार्य अभिव्यक्ति है. जब शब्द भाव से जुड़ते हैं, तो वे केवल भाषा नहीं रहते, वे लोक-जीवन के दर्पण बन जाते हैं. लोक मानस की पीड़ा, उसकी आशा, उसका उल्लास, उसकी संवेदना, सबसे सीधा और सशक्त माध्यम कविता ही रही है. कविता की भूमिका लोक-जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है. कविता मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती है. यह हमें स्मरण कराती है कि दुःख केवल व्यक्तिगत नहीं होता, उसमें मानवता का एक साझा अनुभव भी निहित है. (नीचे भी पढ़ें)

प्रयोगशाला के प्रशासन नियंत्रक जयशंकर शरण ने कहा कि ओजस्वी कविताएं समाज को जागृत करती हैं, अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की ऊर्जा देती हैं. शृंगार और गीत जीवन की मधुरता को व्यक्त कर मनुष्य को सौंदर्य और प्रेम का रस प्रदान करते हैं.व्यंग्य हमें समाज की विसंगतियों से रूबरू कराता है और हँसी के माध्यम से गंभीर सच्चाइयों को समझने की दृष्टि देता है. यह आध्यात्मिक व भावनात्मक संतुलन पैदा करती है. ग़ज़ल और गीत आत्मा की गहराइयों तक उतर कर मनुष्य को सुकून और गहन चिंतन की ओर ले जाते हैं. (नीचे भी पढ़ें)

सोमवार, 8 सितंबर को आयोजित समारोह की अध्यक्षता सीएसआइआर एनएमएल के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ शैलेंद्र कुमार झा ने की. डॉ झा ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिन्दी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की सांस्कृतिक धरोहर और एकता की प्रतीक है. उन्होंने सभी कर्मचारियों से अपील की कि वे अपने दैनंदिन कार्यों में हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग करें. प्रयोगशाला के वरिष्ठ हिन्दी अधिकारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने इस अवसर पर भारत सरकार की राजभाषा नीति पर प्रकाश डाला एवं भारत-सरकार के राजभाषा के संवैधानिक प्रावधानों की जानकारी दी. कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं, जैसे निबंध लेखन, श्रुतिलेख आदि के विजेताओं को सम्मानित भी किया गया. इस अवसर पर संस्था के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने हिन्दी के संवर्द्धन एवं कार्यान्वयन की प्रतिबद्धता दोहराई. (नीचे भी पढ़ें)
01 से 08 सितम्बर 2025 तक आयोजित ‘‘हिन्दी सप्ताह समारोह’’ के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफल प्रतिभागियों को “नगद पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र” देकर सम्मानित किया गया. इन विजेताओं में ‘हिन्दी निबंध प्रतियोगिता’ में एएसी अरिन्दम सेन प्रथम, एमईआर की रुखसाना परवीन द्वितीय, श्रुति प्रिया तृतीय रहीं जबकि एमईआर के सुब्रत शेखर के सांत्वना पुरस्कार मिला. अन्य भाषा-भाषियों के लिए एएमसी के सोमनाथ दास प्रथम,वित्त एवं लेखा विभाग की सुचित्रा भट्ट द्वितीय एवं एमटीई के नीतीश कुमार भकत तृतीय रहे. अभियांत्रिकी विभाग के सीआर चक्रवर्ती को सांत्वना पुरस्कार मिला. इसी प्रकार ‘‘हिन्दी श्रुतलेख प्रतियोगिता” में स्थापनाविभाग के राजू कुमार को प्रथम, वहीं की श्रुति प्रिया को द्वितीय एवं एमईआर के अनीश हांसदा को तृतीय पुरस्कार मिला. आरपीबीडी की ट्विंकल कुमारी को इसमें सान्त्वना पुरस्कार प्रदान किया गया. इसी प्रतियोगिता के हिंदीतर भाषा भाषी वर्ग में एएमसी के सोमनाथ दास प्रथम, आरपीबीडी की श्रीदा पी को द्वितीय एवं एमटीई के नीतीश कुमार भकत को तृतीय पुरस्कार मिला, जबकि वहीं की मिनती कुमारी साहू को सान्त्वना पुरस्कार प्रदान किया गया. (नीचे भी पढ़ें)
वर्ष 2024-25 के दौरा3न सर्वाधिक हिंदी में कार्य करनेवाले कर्मियों को विशेष प्रशंसा पत्र एवं नगद पुरस्कार प्रदान किये गये. इनमें एरपीबीडी के अंजनी कुमार साहू, अभियांत्रिकी के सीआर चक्रवर्ती, स्थापना के परमार्थ सुमन, अभियांत्रिकी के रचित घोष, प्रशासन नियंत्रक कार्यालय के जितेंद्र चौधरी, स्थापना के रोहित मुदी, अनिल कुमार, जितेन महतो, प्रवीण नगरारे, कैंटीन के नंदलाल पासवान,स्थापना के धनंजय चौधरी एवं नीरज कुमार, एमटीआइ के अभिषेक कुमार सिंह, वित्त एवं लेखा के शेखर सांगा एवं सुधीर कुमारस भंडार एवं क्रय के पीयूष रंजन, वहीं के सीताराम मुर्मू, एमएनपी के ज्योति कुमार एवं स्थापना के रविरंजन कुमार शामिल हैं.


