
जमशेदपुर : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मजदूर नेता एसआरए रिजवी छब्बन (सैयद रजा अब्बास रिजवी छब्बन) का गुरुवार को देहांत हो गया. वे करीब 70 साल के थे. डाइबिटीज की बीमारी से ग्रसित एसआरए रिजवी छब्बन कद्दावर कांग्रेस नेता रहे है. गांधी परिवार के करीबी और कांग्रेस के सबसे पुराने नेताओं में से एक एसआरए रिजवी छब्बन की गिनती रही है. वे अपने दमदार उपस्थिति के कारण जाने जाते थे. वे अपने पीछे चार बेटे और एक बेटी का भरा पूरा परिवार को छोड़ गये है. कदमा शास्त्रीनगर ब्लॉक नंबर दो, रोड नंबर दो निवासी एसआरए रिजवी छब्बन ने अपने आवास पर ही अंतिम सांसें ली. वे काफी दिनों से घर पर ही थे और काफी बीमार चल रहे थे. उनके बेटे रईस रिजवी छब्बन ने बताया कि उनके पिता का सुपुर्द-ए-खाक धातकीडीह स्थित कब्रिस्तान में गुरुवार को ही रात करीब नौ बजे किया जायेगा. एसआरए रिजवी छब्बन अपने पीछे कांग्रेस की बड़ी विरासत छोड़ गये है. वे इंदिरा गांधी के वक्त केपी सिंह के साथ मिलकर कांग्रेस को मजबूत बनाये. उनका मजदूरों में भी गहरी पैठ रही है. चाहे टाटा स्टील के कर्मचारियों का मुद्दा हो, बिष्टुपुर बाजार का मुद्दा हो या फिर नोवामुंडी और जादूगोड़ा से लेकर मुसाबानी तक फैले ताम्र और यूरेनियम के खदानों का मुद्दा ही क्यों नहीं हो, वे मुखर होकर मजदूरों की आवाजों को उठाया. यहीं वजह है कि वे कई यूनियनों के अध्यक्ष भी रहे है. उनके ही अध्यक्षता में कई सारे फैसले लिये जा चुके है, जो आज भी मुसाबनी और नोवामुंडी के माइंस में नजीर है.




