जमशेदपुर : जमशेदपुर के बारीडीह स्थित डोंगा घाट, बजरंग चौक में 26 जनवरी को दोपहर लगभग 2 बजे 11 वर्षीय अंकुश कालिंदी (निवासी बिरसानगर) के नदी में डूबने की घटना को एक दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक बच्चे का कोई सुराग नहीं मिल पाया है. सुबह क्षेत्र की विधायक पूर्णिमा दास साहू घटनास्थल पर पहुंचीं और परिजनों व स्थानीय लोगों को यह आश्वासन दिया कि रांची से एनडीआरएफ की टीम भेजी जा रही है. (नीचे भी पढ़े)
लेकिन शाम हो जाने के बावजूद कोई टीम नहीं पहुंची. जब दोबारा विधायक से संपर्क किया गया, तो उन्होंने यह कहकर मामले से पल्ला झाड़ लिया कि “यह काम प्रशासन का है, मैं इसमें कुछ नहीं कर सकती”. इस रवैये से लोगों में भारी नाराज़गी है. घटना के बाद प्रशासन की मौजूदगी तो दिखी, लेकिन किसी भी स्तर पर ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई. खोज-बचाव अभियान सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया, जिससे बच्चे की जान बचाने का वास्तविक प्रयास नजर नहीं आया.(नीचे भी पढ़े)
दोपहर में स्थानीय जनता के सहयोग से जेएनएसी के गोताखोरों को बुलाया गया, लेकिन सीमित संसाधनों और समुचित व्यवस्था के अभाव में वे भी बच्चे को खोजने में असफल रहे. सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब तक डीसी, एसएसपी और एसडीओ में से किसी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, न ही एनडीआरएफ की कोई टीम मौके पर भेजी गई है. (नीचे भी पढ़े)
घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है. लोगों का कहना है कि अगर यही हादसा किसी वीआइपी या मंत्री के बच्चे के साथ हुआ होता, तो पूरा प्रशासन खुद नदी में उतरकर खोज अभियान चला रहा होता. आम नागरिक के बच्चे की जान की कीमत क्या इतनी कम है यह सवाल आज हर किसी के मन में है.




