जमशेदपुर : बिहार में जन्मी और जमशेदपुर में पली-बढ़ी 22 वर्षीया खुशबू कुमारी सिंह उन अनेक युवाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो दृढ़ संकल्प और सही मार्गदर्शन के साथ पेशेवर दुनिया में अपने पहला कदम रख रहे हैं. वे वीमेंस कॉलेज, जमशेदपुर में बीबीए तृतीय वर्ष की छात्रा हैं और एचआर में विशेषज्ञता हासिल कर रही हैं. वह अपने माता-पिता के साथ रहती हैं. अन्य कई पहली पीढ़ी के रोजगार तलाशने वाले युवाओं की तरह, खुशबू ने पहले कभी काम नहीं किया था और उन्हें यह समझ नहीं आ रहा था कि अपने करियर की शुरुआत कैसे करें. उनके जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उनके कॉलेज में सीआइआइ मॉडल करियर सेंटर (एमसीसी) द्वारा एक करियर मार्गदर्शन सत्र आयोजित किया गया. यह पहल टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआइआइ) के सहयोग से संचालित की गई थी. (नीचे भी पढ़ें)

इस सत्र ने उन्हें केवल रोजगार के अवसरों से ही परिचित नहीं कराया, बल्कि कार्यस्थल की अपेक्षाओं, पेशेवर व्यवहार और नियुक्ति प्रक्रिया को आत्मविश्वास के साथ समझने की आवश्यकताओं से भी अवगत कराया, ऐसे पहलू, जो साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं के लिए अक्सर अपरिचित रह जाते हैं. सीआइआइ एमसीसी आकांक्षाओं और रोजगार के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करता है. करियर काउंसलिंग, प्री-स्क्रीनिंग, इंटरव्यू की तैयारी और इंडस्ट्री पार्टनर्स से संपर्क जैसी सुविधाएं प्रदान कर यह युवाओं को अनिश्चितता से निकालकर सूचित निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करता है.
खुशबू के लिए यह मार्गदर्शन और विश्वास का तंत्र रोजगार के विचार को साकार और संभव बनाने वाला साबित हुआ. सीआइआइ एमसीसी के माध्यम से उन्हें नवंबर 2024 में पीएम मॉल में नए खुले मैकडोनाल्ड्स आउटलेट में एक अवसर के बारे में जानकारी मिली. भर्ती प्रक्रिया पर उचित मार्गदर्शन और नौकरी की भूमिका की स्पष्ट समझ के साथ उन्होंने कई चरणों के इंटरव्यू सफलतापूर्वक पूरे किए और क्रू अप्रेंटिस के रूप में चयनित हुईं. अगले कुछ महीनों में खुशबू ने सुव्यवस्थित प्रशिक्षण प्राप्त किया, ग्राहक सेवा कौशल सीखे और स्टोर संचालन संभालने में आत्मविश्वास विकसित किया. मात्र छह महीनों के भीतर उन्हें क्रू ट्रेनर के पद पर पदोन्नति मिली. आज वे नए कर्मचारियों को प्रशिक्षण देती हैं, स्टोर संचालन में सहयोग करती हैं और अपनी कॉलेज की पढ़ाई जारी रखते हुए बिक्री प्रदर्शन में भी योगदान दे रही हैं. उनकी समर्पित मेहनत को पहले ही सराहा जा चुका है.
एक नए उत्पाद के लांच के दौरान उन्होंने स्टोर को बिक्री लक्ष्य हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 10,000 रुपये का प्रोत्साहन पुरस्कार प्राप्त किया. उन्होंने कई टीम सदस्यों को भी प्रशिक्षण दिया है, जिनमें नेतृत्व भूमिकाओं की तैयारी कर रहे प्रबंधन प्रशिक्षु शामिल हैं, यह जिम्मेदारी कभी उन्होंने स्वयं के लिए संभव भी नहीं सोची थी. लगभग 10,000 से 12,000 रुपये की मासिक आय से शुरुआत करने वाली खुशबू अब अपने परिवार की आवश्यकताओं में सहयोग कर पा रही हैं, जो उनके लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. आर्थिक सहयोग से भी अधिक वे उस आत्मविश्वास, अनुभव और आत्मनिर्भरता की भावना को महत्व देती हैं, जो उन्हें इस यात्रा के दौरान प्राप्त हुई है. एमसीसी और फाउंडेशन की भूमिका सीधे तौर पर रोजगार उपलब्ध कराना नहीं थी, बल्कि अवसरों तक पहुंच सुनिश्चित करना था, महत्वपूर्ण चरण पर विश्वसनीय जानकारी, तैयारी और प्रोत्साहन प्रदान करना ही उनकी वास्तविक ताकत रही. (नीचे भी पढ़ें)
खुशबू बताती हैं कि मैंने पहले कभी काम नहीं किया था और मुझे यह नहीं पता था कि शुरुआत कैसे करूं. सीआइआइ एमसीसी के माध्यम से मुझे समझ आया कि कौन-कौन से अवसर उपलब्ध हैं और नौकरी में किन अपेक्षाओं को पूरा करना होता है. उन्होंने मुझे कदम-दर-कदम मार्गदर्शन दिया और प्रयास करने का आत्मविश्वास भी दिया. उनका सहयोग बिल्कुल सच्चा और पारदर्शी था, और हमें इसके लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ा. आज मैं स्वयं को आत्मनिर्भर महसूस करती हूं और मुझे विश्वास है कि मैं अपना करियर बना सकती हूं. सही समय पर मिले इस मार्गदर्शन के लिए मैं आभारी हूं. अब खुशबू स्टोर में अपनी जिम्मेदारियों को आत्मविश्वास के साथ निभा रही हैं और अपने करियर में आगे बढ़ने की आकांक्षा रखती हैं. (नीचे भी पढ़ें)
उनका दीर्घकालिक सपना है कि वे भविष्य में टाटा स्टील के साथ कार्य करें. उनकी कहानी सीआइआइ एमसीसी की व्यापक और प्रभावशाली कार्यप्रणाली को दर्शाती है. मार्च 2021 में स्थापित यह केंद्र झारखंड और ओडिशा के युवाओं को वास्तविक औद्योगिक अवसरों से जोड़ने वाला एक सशक्त मंच बन चुका है. स्थापना के बाद से अब तक सीआइआइ एमसीसी ने 20,000 से अधिक युवाओं का पंजीकरण किया है, 10,000 से अधिक युवाओं को करियर परामर्श प्रदान किया है, तथा करियर मार्गदर्शन, उद्योग-संबद्ध प्रशिक्षण और प्लेसमेंट ड्राइव्स के माध्यम से लगभग 2,500 युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ा है.




