जमशेदपुर : जमशेदपुर के लोकसभा सीट के लिए प्रत्याशी की घोषणा और रायशुमारी को लेकर झामुमो की ओर से बुलायी गयी बैठक को आनन फानन में स्थगित कर दिया गया. जमशेदपुर के झामुमो अध्यक्ष सह घाटशिला क्षेत्र से विधायक रामदास सोरेन ने बुधवार को उलियान स्थित शहीद स्थल पर मीटिंग बुलायी थी. इसमें रायशुमारी होना था, लेकिन मंगलवार की देर रात को ही बैठक को स्थगित कर दिया गया. बताया जाता है कि आलाकमान के आदेश के बाद अचानक से मीटिंग को रद्द कर दिया गया. इस बीच अब रांची से ही प्रत्याशियों की घोषणा होगी, जिसको लेकर आलाकमान ने जिला अध्यक्ष से बातचीत की है. अब तक पार्टी के अंदर से आस्तिक महतो को ही प्रत्याशी बनाने को लेकर तैयारी है. (नीचे भी पढ़ें)
लेकिन अंदरखाने इस बात की भी चर्चा है कि बहरागोड़ा से पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी को भी झामुमो आजमा सकती है. कुणाल षाड़ंगी बहरागोड़ा से झामुमो के ही टिकट पर चुने गये थे. लेकिन बाद में वे 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा में शामिल हो गये थे. लेकिन अब उनकी भी घर वापसी हो सकती है. अगर कुणाल षाड़ंगी पार्टी में शामिल होने को तैयार नहीं हुए तो फिर आस्तिक महतो का नाम सामने हो सकता है क्योंकि वे पुराने दिग्गज नेता है. उनके पक्ष में तीन विधायकों ने लिखकर दिया है. (नीचे भी पढ़ें)
वहीं, आस्तिक महतो के समर्थक पदाधिकारियों का कहना है कि अगर कुणाल षाड़ंगी को टिकट दिया जाता है तो फिर हो सकता है कि पार्टी के अपने विधायक ही उनका साथ नहीं दें. लेकिन हकीकत यह है कि सारे विधायक या अन्य नेता झामुमो से ही पहचाने जाते है. अगर इस बार के लोकसभा चुनाव में किसी भी झामुमो प्रत्याशी का साथ नहीं दिये तो हो सकता है कि इसका विधानसभा में खुद विधायकों को ही नुकसान उठाना पड़ जाये. वैसे भी पार्टी लोकसभा चुनाव में पूरा दमखम के साथ लड़ना चाहती है और सबको आदेश दिया जा चुका है कि जो भी प्रत्याशी होंगे, उसको साथ सबको देना होगा. कुणाल षाड़ंगी युवा तुर्क नेता है. इसके अलावा उनका शहर से लेकर गांव तक पकड़ है, जिसका लाभ भी उनको मिल सकता है. फिलहाल, झामुमो की घोषणा का ही इंतजार है.




