जमशेदपुर : झारखंड के सरकारी अस्पतालों में पीपीपी मोड पर संचालित रेडियोलॉजी जांच सेवाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है. झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने राज्य भर के अस्पतालों को निर्देश जारी कर कहा है कि रेडियोलॉजी सेवाएं चला रही निजी एजेंसियों द्वारा जमा किए गए सभी बिलों की बारीकी से जांच की जाए. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भुगतान केवल उन्हीं जांचों का हो, जो वास्तव में मरीजों की कराई गई हों. स्वास्थ्य निगम ने स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में फर्जी, गलत या बढ़ा-चढ़ाकर बनाए गए बिलों का भुगतान नहीं किया जाएगा. सभी लंबित भुगतानों की समीक्षा कर वास्तविक देय राशि तय करने और एक सप्ताह के भीतर इसकी विस्तृत रिपोर्ट निगम को सौंपने का आदेश दिया गया है. विभाग का कहना है कि यह कदम सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. इस जांच की जिम्मेदारी रांची स्थित रिम्स, जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल, धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज समेत राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जनों और अस्पताल प्रबंधन को सौंपी गई है. (नीचे भी पढ़ें)
अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जांच की तारीख, मरीजों का रिकॉर्ड और रिपोर्ट आपस में मेल खाते हों. किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी. इधर, महात्मा गांधी मेमोरियल एमजीएम अस्पताल में मामला और गंभीर हो गया है. यहां रेडियोलॉजी जांच चला रही एजेंसी ‘हेल्थ मैप’ का करार बीते महीने समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद जांच सेवाएं जारी हैं. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि करार खत्म होने के बाद जांच बंद करने का आदेश दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी सेंटर का संचालित होना कई सवाल खड़े करता है. बुधवार को जब एजेंसी के प्रतिनिधियों से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने दावा किया कि सरकार के साथ नया करार हो चुका है. हालांकि, एमजीएम प्रबंधन का कहना है कि उन्हें अब तक विभाग की ओर से कोई लिखित आदेश या आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है. ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि किसके आदेश पर रेडियोलॉजी सेंटर अभी भी चल रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “एजेंसी को बंद करने का आदेश दिया गया है. इसके बावजूद अगर जांच हो रही है, तो यह गंभीर मामला है. इसकी जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी. विभाग ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच में फर्जी बिलिंग या बिना करार सेवाएं चलाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दोषी अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है. यह पूरी कवायद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है.



