
जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल परिसर में पोर्टेबल हेल्थकेयर यूनिट जिसे (अमेरिका इंडिया फाउंडेशन) एआईएफ द्वारा कमीशन किया गया है और एमजीएम जमशेदपुर में पिक्चर टाइम मेडिकल द्वारा बनाया गया है. जिसके लिए अमेरिका इंडिया फाउंडेशन के फंड से तैयार किया गया है. इसके निर्माण में गड़बड़ी व विवाद के कारण एमजीएम अस्पताल प्रबंधन ने इसे अब तक हैंडओवर नहीं लिया है. जिसके कारण इस यूनिट को तैयार करने वाली कंपनी को पेमेंट नहीं दिया जा रहा है. जिसे लेकर यूनिट के स्टाफ ने प्रदर्शन किया. वहीं दिल्ली से आए कंपनी के सुपरवाजर शैली सिन्हा ने कंपनी पिक्चरटाइम डिजीप्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड के बारें में कई पोल खोले है. उन्होंने बताया कि पिक्चरटाइम ने चीन से सभी तंबू आयात किए हैं. वहां तंबू सस्ते में बनाए जाते हैं और इनके भीतर चिपकाने की प्रवृत्ति खुल जाती है जिससे विभिन्न क्षेत्रों में तंबू फूल जाते हैं. यह गुब्बारा नीचे ट्स को विस्तार करने के लिए धक्का देता है. ट्स को टेंट की छत का वितरित भार लेने के लिए डिज़ाइन किया गया है, लेकिन विशिष्ट स्थानों पर यह गुब्बारा दोष बिंदु दबाव डालता है जो इतना अधिक होता है कि इस ढह जाता है. जैसा कि 8 अक्टूबर 2021 को हुआ था. (नीचे भी पढ़ें)
यह दुर्घटना अब तक दो बार हो चुकी है परन्तु उस समय कोई मरीज या डॉक्टर मौजूद नहीं थे. वहीं पिक्चर टाइम’ में कहा गया है कि ढांचे की उम्र 20 साल है जबकि पूरा होने के 2 महीने बाद भी इस तरह की जानलेवा दुर्घटनाएं हो रही है. इस दुर्घटना को छिपाने के लिए पिक्चर टाइम ने स्वतंत्र एजेंसियों से स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट’ मंगवाए हैं, लेकिन उन एजेंसियों को टेट में खामियों के बारे में सूचित नहीं किया गया है और उन सर्टिफिकेट्स को इस धारणा पर दिया गया है कि इन टैटों में कोई कार्यात्मक दोष नहीं है. इसलिए प्रमाणपत्र अमान्य हैं और उनकी कोई योग्यता नहीं है. उन्होंने बताया कि टेंट असुरक्षित है और इसका उपयोग करने वाले डॉक्टरों और रोगियों के जीवन और सुरक्षा के लिए खतरा है. हाल ही में एक दुर्घटना हो चुकी है जिसके लिए स्वास्थ्य मंत्री ने डीसी और अस्पताल अधीरक्षक से इसकी जांच करने को कहा था.






