जमशेदपुर : जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने एक बार फिर से पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और उनके लोगों की ओर से किये गये कारस्तानियों का खुलासा किया है. श्री राय ने अपने जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित आवास में संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर इसकी जानकारी दी. उन्होंने रघुवर दास के भतीजे कमलेश साहू और संगम अग्रवाल के बीच हुई मारपीट की घटना को लेकर कई सारी जानकारी को स्पष्ट किया है. उन्होंने बताया कि तीन वर्ष पहले जमशेदपुर पूर्वी क्षेत्र की जनता ने उनको (सरयू राय को) इस अपेक्षा से विधायक बनाया था कि इस क्षेत्र में शांति व्यवस्था क़ायम होगी और उस गिरोह पर अंकुश लगेगा जो सत्ता की प्रत्यक्ष या परोक्ष शह से आम जनता के लिए सिरदर्द बन गया है. क़ानून व्यवस्था अपने हाथ में लेकर मनमानी कर रहा है और जब जिसे चाहे प्रताड़ित करते रहता है. श्री राय ने कहा कि उनके चुनाव जीतने के बाद यह गिरोह शिथिल हो गया था. पर अब फिर सिर उठाने लगा है. अपना असली रूप दिखाने लगा है. जनता में ख़ासकर व्यवसायियों में भय और आतंक का वातावरण बनाने की कोशिश करने लगा है. सरयू राय ने बताया कि दो दिन पहले जमशेदपुर शहर के एक उद्यमी संगम अग्रवाल के कार्यालय में घुसकर मारपीट करना इसका ताज़ा उदाहरण है. (नीचे पढ़ें पूरी खबर)
मीडिया में खबर आने के बाद श्री राय ने उद्यमी के कार्यालय जाकर मिले थे. उन्होंने बदन पर लगी चोटों को दिखाया, वहां के सीसीटीवी फ़ुटेज को दिखाया. सरयू राय ने बताया कि इनके कार्यालय में घुसने वालों में एक के हाथ में हथियार दिख रहा है. पुलिस ने मार खाने वाले से भी और मारने वालों से भी एफआईआर ले लिया है. इस मामले से जुड़ा वाट्सएप चैट भी देखा और अभद्र गाली गलौज का ऑडियो भी सुना. हमला पूर्व नियोजित, पूर्व घोषित था. सरयू राय ने कहा कि गत 28 अक्टूबर 2022 को सिदगोड़ा टाऊन हाल मैदान में निहत्थे समूह पर आक्रामक हुजूम के हमला में भी पुलिस ने ढाई माह बीत जाने के बाद भी कोई कारवाई नहीं किया है. अनुसंधान पूरा नहीं किया है. पता नहीं अनुसंधान एफआईआर तक ही सीमित है या हमलावरों की शिनाख्त भी वीडियो देखकर हुई है. दोनों पक्ष से एफआईआर ले लिया है. संतुलन साधने की कोशिश हो रही है. इस मामले में कार्रवाई हो गई होती तो संगम अग्रवाल के ऑफिस में हमला करने की हिम्मत नहीं होती. विधायक सरयू राय ने कहा कि कई ऐसे मामलों की जानकारियां इस बीच पुलिस को दिया है जो उनको (सरयू राय को) क़ानून के प्रतिकूल प्रतीत हो रही हैं. (नीचे भी पढ़ें)
इन मामलों में पुलिस की पहल संतोषजनक नहीं रही है. यह चिंता का विषय है. इससे आपराधिक प्रवृति को प्रोत्साहन मिलता है. सरयू राय ने कहा कि मारपीट करना, थाना में एफ़आइआर के साथ काउंटर एफआईआर होना, एक ही अनुसंधानकर्ता द्वारा दोनों का अनुसंधान करना, अनुसंधान में संतुलन साधना, दबाव डालकर उभय पक्षों में समझौता कराना, अपराधियों एवं ग़ैरक़ानूनी कार्यों में लिप्त रहने वालों के प्रति पुलिस द्वारा उदारता बरता जाना, सत्ता में शामिल लोगों का पुलिस पर दबाव बढ़ना आदि के कारण पीड़ित पक्ष के प्रति न्याय नही होने की स्थिति उत्पन्न हो रही है. श्री राय ने कहा कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता को, खासकर आर्थिक गतिविधियों में संलग्न लोगों को आश्वस्त करना चाहते है कि विगत अनेक वर्षों में व्याप्त भय और आतंक को पुनः इस क्षेत्र में हावी नही होने देंगे और पुलिस के भी पूर्वकाल के रवैया में परिवर्तन के लिए विवश करेंगे.



