जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम ज़िला के पहले लाइसेंसी मुहर्रम अखाड़ा की गौरवशाली इतिहास की परंपरा को अली रज़ा खान ने बुलंदी के नए आयाम तक पहुंचाने का काम किया है. दस दिनों तक शानो शौकत और आलीशान ढंग से हज़रत इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) तथा उनके साथियों की कर्बला में दी गई महान कुर्बानी की याद में अखाड़ा का आयोजन किया जाता रहा है. कांग्रेस के जिला प्रवक्ता राजीव मिश्रा को यहां सम्मानित किया गया. श्री मिश्रा ने कहा कि यह परंपरा हिन्दू-मुस्लिम एकता और धर्मों की सीमाओं से ऊपर इंसानियत और न्याय के लिए खड़े होने का प्रतीक बन चुकी है. हिंदू हुसैनी ब्राह्मणों के पूर्वजों ने कर्बला में इमाम हुसैन के साथ मिलकर यजीद के अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी और शहीद हुए. कर्बला की लड़ाई में इमाम हुसैन के साथ उनके परिवार और 72 साथियों के अलावा, हिन्दू दत्त परिवार के 7 बेटे भी शहीद हुए थे और तो और जब जब हिन्दू हुसैनी ब्राम्हणों को इमाम की शहादत के बारे में पता चला तो उन्होंने अमीर मुख्तार के साथ मिलकर हज़रत ईमाम हुसैन का बदला लिया था. (नीचे भी पढ़ें)
यह हिन्दू-मुस्लिम एकता और न्याय के लिए बलिदान की भावना को दर्शाता है. अखाड़ा के लाइसेंसी सह संचालक अली रज़ा खान ने कहा कि मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है. यह महीना हमें अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, इंसाफ़ की राह पर चलने, और इंसानियत के लिए बलिदान की प्रेरणा देता है. मुहर्रम केवल शोक का नहीं, बल्कि उस महान जज़्बे का प्रतीक है जिसमें सच्चाई और धर्म की रक्षा के लिए जान न्योछावर कर दी गई. आज के दौर में हमें इस सीख को अपनाकर समाज में भाईचारा, एकता और शांति कायम रखने का प्रयास करना चाहिए तथा सभी समुदायों से आपसी सदभाव बनाए रखने, एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने, और मुहर्रम को शांतिपूर्ण, अनुशासित तरीके से मनाने की बधाई दी. अखाड़ा में टाटा वर्कर्स यूनियन के पूर्व उपाध्यक्ष ग़ुलाम मोइनुद्दीन ने संरक्षक की भूमिका निभायी.



