जमशेदपुर : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा सरहुल पर्व पर दो दिन के राजकीय अवकाश की घोषणा को ऐतिहासिक कदम करार देते हुए पोटका विधायक संजीव सरदार ने इस निर्णय की भूरि-भूरि प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि यह फैसला झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं को संजोने और संवारने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा. विधायक संजीव सरदार ने कहा कि वर्षों से आदिवासी समाज की यह मांग थी कि सरहुल, जो उनकी संस्कृति और परंपराओं का महापर्व है, पर दो दिन का अवकाश दिया जाए. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मांग को पूरा कर आदिवासी समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को साबित किया है. विधायक संजीव सरदार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को धन्यवाद देते हुए कहा कि झारखंड की संस्कृति को सहेजने और उसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है.(नीचे भी पढ़े)
उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी राज्य सरकार इसी तरह आदिवासी समाज की मांगों को प्राथमिकता देती रहेगी. पोटका विधायक ने कहा कि झारखंड सरकार आदिवासियों के हित में निरंतर कार्य कर रही है और यह फैसला दर्शाता है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंडी अस्मिता और परंपराओं को सहेजने के प्रति गंभीर हैं. उन्होंने कहा कि यह अवकाश केवल एक छुट्टी नहीं, बल्कि हमारे गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर को संजोने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है. इससे आने वाली पीढ़ियां भी अपने पर्व-त्योहारों के महत्व को समझेंगी. सरहुल पर्व पर दो दिन का अवकाश घोषित किए जाने के बाद पूरे राज्य में खुशी की लहर दौड़ गई है. समाज के बुद्धिजीवियों, सामाजिक संगठनों और आम जनमानस ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस फैसले की सराहना की है.



